रांची। झारखंड में कई जगहों पर सिस्टम लाचार दिखता है। खास तौर पर राज्य के अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार और घूसखोरी चरम पर है।
पिछले 20 दिनों में तीन राजस्वकर्मी घूस लेते हुए गिरफ्तार किये गये हैं। राज्य के तमाम अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है।
जमीन का म्यूटेशन-सक्सेशन कराना हो या डीड में नाम चढ़ाना हो या फिर उसमें सुधार कराना हो, हर काम के घूस की रेट तय है। प्लॉट के आकार के अनुसार 5 हजार रुपए तक प्रति डिसमिल तक घूस ली जा रही है।
भू-राजस्व विभाग द्वारा सभी अंचलों की जमीन से जुड़े रेकर्ड ऑनलाइन कराए गए थे। लेकिन मॉनिटरिंग नहीं होने से काफी रैयतों की जमीन का डेटा ऑनलाइन नहीं चढ़ा।
सरकार ने स्व दाखिल-खारिज कराने का सिस्टम लागू किया, ताकि रजिस्ट्री होने के बाद अंचल कार्यालयों से स्वयं म्यूटेशन हो जाए, लेकिन बिना पैसा दिए म्यूटेशन-सक्सेशन का काम नहीं होता।
अंचलों की स्थिति ऐसी हो गई है कि बिना पैसा दिए जमीन की मापी भी नहीं होती है।
इसी का नतीजा है कि पिछले 23 दिनों में रांची सहित तीन जिलों के अंचल कार्यालयों से राजस्व उप निरीक्षक घूस लेते गिरफ्तार हो चुके हैं।
अनगड़ा अंचल के राजस्व उप निरीक्षक कुलदीप साहू और अमीन प्रभु पाहन को दस हजार रुपए घूस लेते एसीबी ने पकड़ा था।
26.52 एकड़ जमीन का डेटा ऑनलाइन कराने के लिए रैयत मनोज मुंडा से राजस्व उप निरीक्षक ने आठ हजार रुपए प्रति डिसमिल की दर से घूस मांगी।
लेकिन अधिक रकम होने की वजह से मात्र दो प्लॉट को ऑनलाइन करने के बदले 1.40 लाख रुपए की मांग की गई। एक लाख में डील फाइनल हुआ। इसके एवज में पहली किस्त दस हजार रुपए लेते कर्मचारी को पकड़ा गया।
• लोहरदगा अंचल के राजस्व निरीक्षक रामा महतो को 8 मार्च को एसीबी ने छह हजार रुपए घूस लेते गिरफ्तार किया। सरोज कुमार खत्री की बहु की चार डिसमिल जमीन का म्यूटेशन करने के एवज में घूस की मांग की गई थी।
पहले तो छह माह तक अंचल कार्यालय में आवेदक को दौड़ाया गया। घूस की रकम तय होने के बाद म्यूटेशन करने के लिए तैयार हुआ। एसीबी ने घूस लेते कर्मचारी को पकड़ लिया।
• अरगोड़ा, नामकुम, ओरमांझी, कांके, रातू, नगड़ी, हेहल और शहर अंचल में जमीन विवाद के कई मामले हैं। ऑनलाइन रेकर्ड में रैयत के नाम, खाता-प्लॉट और रकबा में गड़बड़ी है।
इसमें सुधार कराने के लिए आवेदन देने पर कई माह तक दौड़ाया जाता है। इसके बाद दलाल रेट तय करता है। पैसा देने पर ही काम होता है।
• जमीन-फ्लैट की रजिस्ट्री के बाद अंचल कार्यालयो में उसकी एक प्रति ऑनलाइन जाती है, पर म्यूटेशन नहीं होता है। जब तक अंचल के दलाल व कर्मी से मिलकर नजराना नहीं चढ़ाया जाता, फाइल आगे नहीं बढ़ती।
• जमीन की मापी कराने का ऑनलाइन आवेदन देने के बाद जब तक अमीन को उसके मुताबिक खर्च नहीं मिलता, मापी की रिपोर्ट तैयार नहीं होती। बंटवारे की जमीन के सक्सेशन कराने के मामले में भी हजारों रुपए की मांग की जाती है।
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