प्राथमिक शिक्षकों के प्रमोशन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 2 हफ्ते में मांगा जवाब [Supreme Court bans promotion of primary teachers, seeks reply within 2 weeks]

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रांची। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश के आलोक में जिला स्तर पर नियमावली 1993 के प्रावधानों के तहत प्राथमिक शिक्षकों को प्रमोशन देने की प्रक्रिया चल रही है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में प्राथमिक शिक्षकों को प्रमोशन दिया जा रहा था।

सुप्रीम कोर्ट में सुधीर कुमार दुबे समेत अन्य के द्वारा एसएलपी याचिका लगाकर झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।सुप्रीम कोर्ट केजस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वारले की पीठ ने याचिका को स्वीकार कर लिया है।

साथ ही प्रतिवादियों को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले का निष्पादन होने तक यथा स्थिति बनाए रखा जाये।सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद प्राथमिक शिक्षकों के प्रमोशन पर रोक लग गई है।

इन शिक्षक नेताओं ने किया स्वागतः

अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी और महासचिव राम मूर्ति ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार करने और यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश का स्वागत किया है।

याचिका कर्ता की ओर से अधिवक्ता परमजीत सिंह पटवालिया और अधिवक्ता आरके सिंह ने पक्ष रखा। इधर झारखंड प्रगतिशील प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव बलजीत सिंह ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका स्वीकार किया गया है।

हाईकोर्ट की तरह ही सुप्रीम कोर्ट से भी शिक्षकों को न्याय मिलेगा। अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पलामू जिले के शिक्षकों के मामले में यथा स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।

प्रिंसिपल पद पर दी जानी थी प्रोन्नति :

प्राथमिक शिक्षकों को प्रिंसिपल के पद यानि ग्रेड-7 में प्रमोशन देने की कार्यवाही चल रही थी। बताते चलें कि राज्य के 95 प्रतिशत स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं है।

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