जानें शुभ मुहूर्त का समय और मंत्र
रांची। नवरात्रि का आरंभ 3 अक्टूबर गुरुवार से हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है।
कलश की स्थापना करने के साथ ही भक्त मां दुर्गा को अपने घर में 9 दिनों के लिए आमंत्रित करते हैं। इसलिए घटस्थापना शुभ मुहूर्त में करना बेहद जरुरी है।
आइए जानते हैं घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और नियम क्या हैं।
कल से शारदीय नवरात्र का शुभारंभः
नवरात्रि का आरंभ अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से यानी 3 अक्टूबर से हो रही है। अश्विन माह में आने वाले नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ होती है।
मान्यता है कि जो व्यक्ति इन 9 दिनों में मां दुर्गा की सच्चे दिल से प्रार्थना करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
इसी बीच नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना शुभ मुहूर्त में करना बेहद जरुरी है। आइए जानते हैं नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के शुभ मुहूर्त ।
पूजा अज्ञचना का शुभ समयः
मान्यताओं और धर्मग्रंथों के अनुसार, घटस्थापना और देवी पूजा प्रात: काल में करने का विधान है। लेकिन, इसमें चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में करना वर्जित माना गया है।
3 अक्टूबर गुरुवार के दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग दोनों नहीं है। इसलिए प्रात: काल घटस्थापना की जा सकती है। आइए जानते हैं आपके शहर के अनुसार, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है।
नवरात्रि 2024 घटस्थापना का शुभ मुहूर्तः
- दिल्ली – सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 8 बजर 39 मिनट तक। इसके बाद अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 46 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक।
- कोलकाता – 5 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक। इसके बाद अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 1 मिनट से 11 बजकर 48 मिनट तक।
- शिमला – 6 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 50 मिनट तक। इसके बाद अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक।
- मुंबई – सुबह 6 बजकर 33 मिनट से 8 बजकर 55 मिनट तक। इसके बाद अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 03 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक।
- चेन्नई – सुबह 6 बजकर 02 मिनट से 8 बजकर 24 मिनट तक। इसके बाद अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 34 मिनट से 12 बजकर 21 मिनट तक।
- लखनऊ – सुबह 6 बजकर 04 मिनट से 8 बजकर 37 मिनट तक। इसके बाद अभिजित मुहूर्त 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक।
- वाराणसी – सुबह 5 बजकर 55 मिनट से 8 बजकर 16 मिनट तक। इसके बाद अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 23 मिनट से 12 बजकर 1 मिनट तक।
- देहरादून – सुबह 6 बजकर 16 मिनट से 8 बजकर 36 मिनट तक। इसके बाद अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 43 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक।
- बैंगलुरु – सुबह 6 बजकर 12 मिनट ससे 8 बजकर 35 मिनट तक। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक।
- भोपाल – सुबह 6 बजकर 6 मिनट ससे 8 बजकर 37 मिनट तक। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक।
- हैदराबाद – सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 32 मिनट तक। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 28 मिनट तक।
- चंड़ीगढ़ – सुबह 6 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 2 मिनट तक। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक।
- रांची – सुबह 5 बजकर 55 मिनट से 8 बजकर 16 मिनट तक। इसके बाद अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 23 मिनट से 12 बजकर 1 मिनट तक।
कलश स्थापना का मंत्रः
ओम आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दव:। पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशतादयिः।।
इस मंत्र का जप करते हुआ कलश की स्थापना करें।
कलश स्थापना में रखें इन बातों का ख्यालः
नवरात्रि के पहले दिन जब आप कलश की स्थापना करें तो खुद को शुद्ध रखें और मन को भी नकारात्मक विचार न लाएं।
नवरात्रि के पहले दिन, कलश की स्थापना उत्तर-पूर्व दिशा में करें। इसके अलावा आप उत्तर या पूर्व दिशा में भी कलश की स्थापना कर सकते हैं।
कलश की स्थापना करने के साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें की आप 9 दिनों तक पूरे विधि विधान से रोजाना कलश की पूजा करें।
नवमी तक रोजाना कलश की पूजा करने से बाद दशमी तिथि में कलश का विसर्जन करें।
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