Naxalite network broken in Saranda: सारंडा में नक्सलियों का नेटवर्क टूटा, बड़े एनकाउंटर के बाद जंगलों में मची भगदड़

Anjali Kumari
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Naxalite network broken in Saranda

रांची। झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सलियों की कमर अब पूरी तरह टूटती नजर आ रही है। 22 जनवरी 2026 को हुए बड़े एनकाउंटर के बाद नक्सली संगठन में डर और अस्थिरता का माहौल है। इस मुठभेड़ में 17 नक्सली मारे गए, जिनमें एक करोड़ रुपये का इनामी कुख्यात नेता अनल उर्फ पतिराम मांझी भी शामिल था। इस घटना के बाद कभी नक्सलियों का सबसे सुरक्षित गढ़ माने जाने वाले सारंडा में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई है।

रनिंग कैंप में शिफ्ट हुए नक्सली

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बचे हुए नक्सली अब स्थायी कैंप लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। वे “रनिंग कैंप” की रणनीति अपना रहे हैं, जिसमें रात के लिए अस्थायी ठिकाना बनाकर सुबह होते ही स्थान बदल दिया जाता है। इससे वे सुरक्षा बलों की नजर से बचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह रणनीति उनके लिए बेहद मुश्किल साबित हो रही है।

कभी मजबूत था नक्सलियों का गढ़

एक समय सारंडा में नक्सलियों के पक्के कैंप और अंडरग्राउंड बंकर हुआ करते थे। इन बंकरों में हथियार, अनाज, दवाइयां और विस्फोटक सामग्री जमा रहती थी। सुरक्षा बलों ने पिछले एक साल में 45 से अधिक बंकर ध्वस्त किए हैं, जिससे नक्सलियों की लॉजिस्टिक ताकत भी खत्म होती जा रही है।

सुरक्षा बलों का दबदबा बढ़ा

वर्ष 2022 से अब तक सारंडा में करीब चार दर्जन सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। बीते पांच सालों में लगभग 380 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है और 27 नक्सली मुठभेड़ों में मारे गए हैं। साथ ही सैकड़ों आईईडी और स्पाइक होल नष्ट किए गए हैं।

नेतृत्व संकट से जूझ रहा संगठन

झारखंड में भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व पर लगातार कार्रवाई से संगठन कमजोर पड़ा है। कई बड़े नेताओं की गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और मौत के बाद नक्सली अब बिखरते नजर आ रहे हैं। पुलिस का दावा है कि सारंडा में बचे 40–50 नक्सली भी पूरी तरह घेराबंदी में हैं और नक्सलवाद अब अंतिम सांसें गिन रहा है।

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