लोकपाल की नियुक्ति के बावजूद आरयू डिफॉल्टर [RU defaulter despite appointment of Lokpal]

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यूजीसी की डिफॉल्टर थर्ड लिस्ट में 63 विवि

रांची। लोकपाल नियुक्त करने के बाद भी रांची यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के डिफॉल्टर लिस्ट से बाहर नहीं निकली है।

रांची यूनिवर्सिटी में दो माह पहले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (डीएसपीएमयू) के पूर्व एक्टिंग कुलपति प्रो. यूसी मेहता को नियुक्त किया था।

यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा इसकी सूचना यूजीसी को भेज दी गई थी। इसके बाद यूजीसी द्वारा थर्ड डिफॉल्टर की लिस्ट दो जुलाई को जारी की गई है। इसमें रांची यूनिवर्सिटी समेत देश भर के 63 विश्वविद्यालयों के नाम है।

यूजीसी को दी गई है जानकारी

इस संबंध में रांची यूनिवर्सिटी के डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहू ने बताया कि यूजीसी को लोकपाल नियुक्त किए जाने की जानकारी दे दी गई है।

इसके बाद भी डिफॉल्टर लिस्ट में रांची विवि का नाम आना समझ से परे है। सोमवार को यूजीसी से जानकारी लेंगे कि रांची यूनिवर्सिटी को डिफॉल्टर विश्वविद्यालयों की लिस्ट में नाम क्यों डाला गया है।

यूजीसी ने 63 विश्वविद्यालयों को लोकपाल की नियुक्ति के लिए एक और मौका दिया है। अगर ये विश्वविद्यालय तय समय के अंदर लोकपाल की नियुक्ति नहीं करते हैं तो इनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।

डिफॉल्टर होने की वजह

यूजीसी रेगुलेशन के अनुसार लोकपाल नियुक्त करने के साथ स्टूडेंट्स ग्रिवांस रिड्रेशल कमेटी (एसजीआरसी) कमेटी गठित करने का प्रावधान है।

इस कमेटी स्पेशल इनवाइटी मेंबर के रुप में स्टूडेंट्स भी होगा। कमेटी का कार्यकाल दो वर्ष होगा।

बताते चलें कि आरयू प्रशासन द्वारा यूजीसी को लोकपाल नियुक्ति की सूचना तो दे दी गई है। लेकिन कमेटी के बारे में जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए डिफॉल्टर लिस्ट में रखे जाने का यह भी वजह हो सकता है।

इसलिए हो रही लोकपाल की नियुक्ति

विश्वविद्यालयों में स्टूडेंट्स की शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए लोकपाल की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।

लोकपाल का काम किसी भी स्टूडेंट्स की शिकायतों को सुनना और उनका समाधान करना है।

इसमें एडमिशन, फीस, उत्पीड़न, सर्टिफिकेट, परीक्षा, छात्रवृत्ति, आरक्षण आदि से जुड़ी अनियमितताएं शामिल हैं।

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