ये हैं रांची की भूतिया [Ranchi Ki Bhootiya] जगहें, जहां लगता है डर

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रांची की भूतिया

वैसे तो वैज्ञानिक भूत-प्रेतों के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं और इन्हें मन का वहम करार देते हैं लेकिन जनमानस में भूतों का अस्तित्व बरकरार है।

इसकी वजह इन स्थानों पर होनेवाली अजीबो-गरीब घटनाएं हैं। भूत-प्रेत में विश्वास पीढ़ियों से लोगों के दिमाग में गहराई से जुड़ा हुआ है और यह आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक विकास के युग में अभी भी बना हुआ है।

अब राजधानी रांची की ही बात करें तो यहां भी कई ऐसे स्थान हैं जिन्हें भूतिया स्थान कहा जाता है।

तो आइए आज जानते हैं कौन हैं रांची के हॉंटेड [रांची की भूतिया] प्लेस।

बेगुनकुदर [रांची की भूतिया]

रांची से 90 किलोमीटर की दूरी पर एक स्टेशन स्थित है जिसका नाम है बेगुनकुदर। कहा जाता है कि यह स्टेशन भुतहा स्टेशन है।

यहां भूत ट्रेन से रेस लगाती है। इस वजह से अब कोई भी लोको पायलट ट्रेन को इस स्टेशन में नहीं रोकता है।

इसको देखते हुए इस स्टेशन को अब रेलवे ने बंद कर दिया है। यह स्टेशन दक्षिण-पूर्व रेलवे के रांची रेल मंडल पर झालदा और कोटशिला स्टेशनों के बीच है।

रांची से ट्रेन से आसनसोल और खड़गपुर जाने वाले यात्री इस ट्रेन से परिचित तो है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह स्टेशन रेलवे के रिकॉर्ड में भारत के 10 प्रेतबाधित स्टेशनों में से एक है।

रेलवे के अधिकारियों का भी मानना है कि यह एक भूतबाधित स्टेशन है और रेलवे ने उसे बंद कर दिया है।

ऐसी चीजें सुनने को मिली है की प्रेतात्मा ट्रेन के आगे पटरियों पर देखी जाती है और भूत के खौफ के कारण वहां पायलट ट्रेन नहीं रोकना चाहता था. जिस कारण रेलवे को यह कदम उठानी पड़ा।

हालांकि 2009 में एक बार फिर से इसे खोला गया था लेकिन स्थिति वही थी।

नेशनल हाइवे 33 [रांची की भूतिया]

नेशनल हाइवे 33 जिसे रांची-टाटा हाइवे के नाम से भी जाना जाता है। रांची के प्रमुख भुतिया जगहों में से एक है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि रात के समय कई महिलाएं सफ़ेद साड़ी पहने इस सड़क पर घूमती रहती हैं और मुसाफिरों से लिफ्ट मांगती रहती हैं।

सफ़ेद साड़ी में महिलाओं को देखर कई लोगों का एक्सीडेंट भी हो चुका है। कई लोगों का यह भी मानना है कि रात के करीब 12 बजे के बाद कई महिलाएं सफ़ेद साड़ी में लिपटे सड़क के बीचों-बीच नाचती भी रहती हैं।

यहां चलने वाली गाड़ियों के ड्राइवर का कहना है कि यहां से पार होने पर एक अलग सी एनर्जी महसूस होती है।

कई बार तो ऐसा लगता है मानो आपकी पीछे कोई गाड़ी है। लेकिन आप पलट कर देखते हैं तो वहां कोई नहीं होता।

तो कई बार गाड़ी के सामने लगता है कोई खड़ा है और इसी चक्कर में कई बार भयानक एक्सीडेंट भी हो जाता है।

इस घाटी से अक्सर पार होने वाले प्रशांत बताते हैं रात में ड्राइविंग करते समय मुझे ऐसा लगा कि मेरी गाड़ी के सामने कोई अचानक आकर खड़ा हो गया है।

लेकिन वहां पर कोई नहीं था। ऐसा कई बार इस रोड में महसूस हुआ है। इसीलिए लोग यहां रुकते नहीं बल्कि गाड़ी स्पीड कर निकल जाते हैं।

यहां भूत के प्रकोप को दूर करने के लिए सड़क पर मां काली और भगवान बजरंग बली के मंदिर भी बनाए गए हैं।

इनसे एक्सीडेंट की संख्या में कमी आयी है लेकिन लोगों के मन से डर नहीं गया है।

एचईसी कॉलोनी का घर संख्या-13 [रांची की भूतिया]

रांची में मौजूद एचइसी कॉलोनी का घर संख्या-13 एक बेहद डरावनी जगह है। यह घर एक नाले के पास मौजूद है।

रांची की सरकारी विभाग में काम करने वाले लोग इस घर में रहते थे। लेकिन कुछ समय बाद वो छोड़ कर चले गए।

कहा जाता है कि यहां हुई कई डरावनी घटनाओं के बाद प्रशासन ने लोगों से घर खाली करवा लिए।

किंवदंती के अनुसार इस घर में से कोई भी जीवित नहीं रहा था। डरावनी कहानियों के बाद इस घर के आसपास मौजूद अन्य घर में रहने वाले लोग भी घर छोड़कर किसी अन्य जगह चले गए।

स्थानीय लोगों का यह दावा है कि बहुत पहले इस घर में एक भाई-बहन की जोड़ी रहती थी और बाद में उन्होंने आत्महत्या कर ली।

इस घटना के बाद कोई भी इस घर के आसपास घूमने से डरता है। शमा होते ही कोई भी इस घर के आसपास नहीं जाना चाहता है।

ओल्ड पुलिस स्टेशन [रांची की भूतिया]

रांची में मौजूद ओल्ड पुलिस स्टेशन भी भुतहा जगहों में से एक है। स्थानीय लोगों कि माने तो उनका कहना है कि रात के समय यहां से महिलाओं और बच्चों की डरावनी आवाजें आती हैं।

कहा जाता है कि इस तथ्य को प्रमाणित करने के लिए कुछ पुलिस अधिकारी भी रात के समय यहां पहुंचे थे लेकिन कुछ ही देर बाद डरावनी आवाज के चलते भाग खड़े हुए।

ओल्ड पुलिस स्टेशन को एक लॉज के रूप में इस्तेमाल किया जाता है लेकिन डरावनी घटनाओं के बाद यहां अब कोई नहीं जाता है।

टीबी सेनेटोरियम इटकी [रांची की भूतिया]

रांची की भूतिया

इटकी में मौजूद टीबी सेनेटोरियम अंग्रेजों द्वारा चलाया जाता था। कहा जाता है कि कुछ समय बाद इसे मेडिकल ट्रेनिंग कॉलेज में बदल दिया गया था।

कुछ समय बाद यहां टीवी मरीज का इलाज होने लगा लेकिन कुछ समय बाद कुछ मरीजों ने कई डॉक्टरों को पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।

इस घटना के बाद मरीज भी मरने लगे। कहा जाता है कि डॉक्टर और मरीज के मारने के बाद से यहां कोई भी डर के चलते नहीं जाता था।

स्थानीय लोगों के अनुसार शाम होते ही इस सेनेटोरियम के आसपास जाने से भी लोग डरते हैं।

रॉयल बंगला कांके [रांची की भूतिया]

यह बंगला कृषि भवन के अंदर स्थित है। यह बंगला करीबन 200 साल पुराना बताया जाता है।

यहां के निवासी श्याम किशोर बताते हैं यह बंगला हमारे क्वार्टर के पास है और रात में इस यहां से अजीब सी रोने की आवाज आती है।

शाम ढलने पर यहां से कोई नहीं पार होता। उन्होंने आगे बताया कि पिछले 80 सालों से यह बंगाल वीरान पड़ा हुआ है।

लोग इसके आसपास भटकने से भी कतराते हैं। लोग कहते हैं कि अंग्रेजो के जमाने में यहां राजा-रानी रहा करते थे और इसी बंगले में रानी ने आत्महत्या कर ली थी।

तब से बंगले में कोई भी रहना नहीं चाहता है। जो भी यहां रहने आता है उसकी आकस्मिक मृत्यु हो जाती है। इसीलिए इस बंगले से लोग कोसों दूर रहते हैं।

धुर्वा का बायपास रोड [रांची की भूतिया]

रांची के धुर्वा स्थित सेक्टर 2 बायपास रोड भूताहा रोड में से एक है। यहां पर शाम ढलने के बाद कई लोगों ने रोड पर भूत देखने की बातें कही है।

यह रोड बिल्कुल सुनसान और वीरान दिखता है। बड़ी-बड़ी गाड़ियां ही यहां से पार होती है। यहां पर हमने भी कई बार एक लड़की को रोड पर बैठे देखा है और अचानक वह गायब हो जाती है।

इन स्थानों के अलावा दशम फॉल को भी भटकती आत्मा का निवास स्थान बताया जाता है। पहले यहां डूबने से बड़ी संख्या में मौतें होती थीं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इन मौतों के पीछे है एक भटकती आत्मा। एक ऐसे प्रेमी की आत्मा जो आज भी प्यार को मुकाम न दे पाने का गुस्सा यहां आने वाले सैलानियों की जान लेकर उतार रहा है।

आरजेडी के सुप्रीमो लालू प्रसाद की एक बेटी के दोस्त अभिषेक की भी मौत यहीं हुई थी।

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