JTET exam:
रांची। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) का आयोजन पिछले 9 वर्षों से नहीं हो पाया है, जिससे लाखों अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट कर दिया कि प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति के लिए TET पास करना अनिवार्य है। अब परीक्षा कराने का अंतिम फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथ में है।
2011 से अब तक सिर्फ एक बार परीक्षा
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2011 के तहत हर साल JTET परीक्षा होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक सिर्फ 2016 में ही परीक्षा आयोजित हुई। इस बीच रघुवर दास और हेमंत सोरेन की सरकारों में परीक्षा नहीं हो पाई।
विज्ञापन और विवाद
2024 में JAC ने दो बार JTET का विज्ञापन निकाला। पहली बार सिलेबस की गड़बड़ी और दूसरी बार भाषा चयन विवाद के कारण परीक्षा रद्द हो गई। खूंटी, पलामू और गढ़वा जैसे जिलों में प्रमुख स्थानीय भाषाओं को शामिल न करने पर अभ्यर्थियों ने विरोध किया।
अभ्यर्थियों का आंदोलन
26 अगस्त 2025 को विधानसभा मानसून सत्र के दौरान अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर परीक्षा कराने की मांग रखी। अभ्यर्थियों का कहना है कि 2016 के बाद से परीक्षा न होने से करीब 5 लाख उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं और कई की उम्र सीमा भी पार हो चुकी है।
नियुक्तियों पर असर
JTET न होने के कारण सहायक आचार्य भर्ती में लगभग 15,000 पद खाली रह गए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि बिना JTET पास कोई भी शिक्षक नियुक्त नहीं होगा।
अब सीएम से उम्मीद
वर्तमान में स्कूली शिक्षा विभाग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि नियमावली की विसंगतियां दूर कर परीक्षा जल्द आयोजित होगी। शिक्षक दिवस के मौके पर इस दिशा में ठोस निर्णय लाखों युवाओं के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
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