Surya Hansda encounter:
रांची। गोड्डा जिले में सूर्या हांसदा के एनकाउंटर को लेकर झारखंड की राजनीति में उबाल आ गया है। राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और चंपाई सोरेन ने इस एनकाउंटर को संदेहास्पद बताते हुए CBI या हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।
“यह एनकाउंटर नहीं, हत्या है”-बाबूलालः
बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि “यह एनकाउंटर नहीं, हत्या है”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस एनकाउंटर को सीधे तौर पर हत्या करार दिया। उन्होंने कहा कि सूर्या हांसदा की पत्नी और मां लगातार कह रही हैं कि यह फर्जी मुठभेड़ है और उनकी एकमात्र मांग है कि पूरे मामले की जांच CBI से कराई जाए। मरांडी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “आदिवासी नेता को अपराधी साबित करना हो, या जमीन पर कब्जा कराना हो झारखंड पुलिस के कुछ अधिकारी पैसे लेकर यह सब करवा रहे हैं।” उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि अगर CBI जांच संभव नहीं है, तो कम से कम हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच करवाई जाए।
साजिश के तहत की गई हत्याः अर्जुन मुंडा…
वहीं अर्जुन मुंडा ने कहा है यह “साजिश के तहत की गई हत्या” है। पूर्व मुख्यमंत्री ने तोरपा में पत्रकारों से बात करते हुए इसे गहरी साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि सूर्या हांसदा लगातार कोयला, बालू, और गिट्टी के अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उन्होंने बताया कि हांसदा की गिरफ्तारी उनके घर से हुई थी, वह बीमार थे और उनकी पत्नी ने पुलिस से गुहार भी लगाई थी, बावजूद इसके उन्हें फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया। मुंडा ने स्पष्ट किया कि वह अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में नहीं हैं, लेकिन “फर्जी मुठभेड़ों के जरिए निर्दोषों को खत्म करना न्याय के साथ खिलवाड़ है।”
आदिवासियों की आवाज दबाई जा रहीः चंपाई…
पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने कहा कि “सरकारी तंत्र की मदद से आदिवासियों की आवाज दबाई जा रही” है। चंपाई सोरेन ने भी सूर्या हांसदा की मौत पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि जो भी आदिवासियों के अधिकारों और माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाएगा, उसे चुप कराने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया जाएगा। उन्होंने सवाल किया, “अगर सूर्या को देवघर में गिरफ्तार किया गया, तो रास्ते में वह कैसे हमलावर हो गया? हथकड़ी लगे एक बीमार व्यक्ति ने पुलिस पर कितनी गोलियां चलाईं? आधी रात को जंगल में क्यों ले जाया गया? और गोलियां सीने पर क्यों लगीं?”
चंपाई सोरेन ने कहा कि एक ही राज्य में, जब आरोपी किसी खास समुदाय से होता है, तो सरकार उसके परिवार को मदद, नौकरी, और समर्थन देती है। लेकिन, आदिवासी नेताओं के साथ ऐसा क्यों नहीं होता? उन्होंने चेतावनी दी कि यह प्रवृत्ति खतरनाक है और झारखंड में अब आदिवासियों पर अत्याचार सामान्य होता जा रहा है। उन्होंने भी CBI जांच की मांग की।
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