21 एकेडमिक प्वाइंट कम रहने पर चुने गये फैकल्टी का विरोध [Protest against the faculty selected due to less than 21 academic points]

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रांची। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (डीएसपीएमयू) के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट विभाग के एमबीए में अनुबंध के आधार पर फैकल्टी (असिस्टेंट प्रोफेसर) के पद नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। रिजल्ट घोषित होने साथ मेरिट की अनदेखी के आरोप लगने लगे हैं।

एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अमन अहमद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल रजिस्ट्रार डॉ. नमिता सिंह से मिला और इस ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए जांच की मांग की है। कहा कि 43.3 एकेडमिक प्वाइंट वाले अभ्यर्थी का चयन हो गया है।

वहीं 64.25 एकेडमिक अंक लाने वाले अभ्यर्थी का चयन नहीं हुआ है। रजिस्ट्रार डॉ. नमिता सिंह ने कहा कि इंटरव्यू बोर्ड की कमेटी ने ही अधिक अंक वाले अभ्यर्थी को एमबीए फैकल्टी पद के लिए अयोग्य बताया है। इसलिए चयन नहीं हो सका है।

कम अंकवाले की नियुक्ति का हो रहा विरोधः

बताते चलें कि एमबीए के एचआर विभाग में एससी कैटेगरी में विक्रांत कुमार रवि और जेए गौरव ने आवेदन दिया था। विक्रांत कुमार रवि का एकेडमिक अंक 43.3 था, जबकि जेए गौरव का एकेडमिक प्वाइंट 64.25 था। विक्रांत और गौरव दोनों फैकल्टी नियुक्ति इंटरव्यू में शामिल हुए थे।

एनएसयूआई ने कहा कि नियम की अनदेखी कर पहुंच-पैरवी वाले का चयन किया गया है। कहा कि बिना नेट-पीएचडी वाले अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में शामिल किया गया है, जो सरकार की नियमावली 2018 की अनदेखी है। इस पर रजिस्ट्रार ने कहा कि नियम की अनदेखी नहीं की गई है।

प्रतिनिधिमंडल में अमन अहमद, तनु सिंह, हुसैन अंसारी, प्रिंस राज, अमित कुमार, प्रिंस राज, सरफराज अहमद, इकबाल अख्तर, वी कुमार समेत अन्य थे।

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