Jharkhand High Court:
रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को जेपीएससी की ओर से आयोजित 11वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया पर सुनवाई की। अदालत ने जेपीएससी से एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा। साथ ही, यह भी कहा कि अगर नियुक्ति प्रक्रिया सरकार द्वारा आगे बढ़ाई जाती है, तो उसका असर अदालत के अंतिम आदेश पर पड़ेगा। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि आयोग की ओर से जवाब नहीं मिलता है, तो आगे कोई मौका नहीं दिया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया का पालन सही तरीके से नहीं हुआ, तो उसे अस्थायी रूप से रोक दिया जा सकता है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि 11वीं जेपीएससी परीक्षा में मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह से नियमविरुद्ध रही। उनके अनुसार, कॉपी जांचने वाले शिक्षकों के पास कम से कम 10 साल का कॉलेज स्तर पर या 5 साल पीजी कॉलेज स्तर पर पढ़ाने का अनुभव होना चाहिए था, लेकिन केवल डेढ़ साल के अनुभव वाले शिक्षकों से यह काम लिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह नियमों का उल्लंघन है, और इसके कारण परीक्षा परिणाम की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने परीक्षा परिणाम को निरस्त करने की मांग की है।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने आयोग की चुप्पी पर असंतोष व्यक्त किया। न्यायाधीशों ने कहा कि एक संवैधानिक संस्थान होते हुए भी जेपीएससी का जवाब न देना न्यायिक प्रक्रिया का अनादर है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि नियमों का उल्लंघन सिद्ध होता है, तो नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है।
अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। तब तक आयोग को जवाब दाखिल करना होगा। अगर इस बीच सरकार नियुक्तियां करती है, तो वह कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रहेंगी।
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