Jharkhand government: झारखंड सरकार ने नहीं दिया 1.33 लाख करोड़ का हिसाब

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रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने सीएजी की 3 रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखी। इसमें एक रिपोर्ट राज्य के वित्तीय लेखा जोखा से संबंधित है। विधानसभा में पेश 31 मार्च 2024 को समाप्त हुए वित्त वर्ष से संबंधित रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र से मिले सहायता अनुदान की राशि के खर्च का हिसाब राज्य सरकार द्वारा केंद्र को वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद देने का प्रावधान है।

हालांकि, ऑडिट में पाया गया कि राज्य सरकार ने मिले 1.33 लाख करोड़ रुपए के केंद्रीय अनुदान के खर्च की उपयोगिता प्रमाण पत्र केंद्र सरकार को निर्धारित समय सीमा में नहीं दी। इस राशि के खर्च के लिए राज्य सरकार द्वारा कुल 47,367 उपयोगिता प्रमाण पत्र दिया जाना है।

राजस्व में 9.57 प्रतिशत की वृद्धिः

सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के कुल राजस्व में 9.57 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जबकि, राज्य के अपने स्रोतों से मिलने वाले राजस्व में 11.49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय वर्ष 2022-23 के मुकाबले 2023-24 में राज्य के कुल खर्च में 19.58 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2022-23 के मुकाबले 2023-24 में सरकार के राजस्व खर्च में 14.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले चार वर्षों के दौरान राज्य के राजकोषीय घाटे में भी कमी पाई गई है।

आम लोगों को खर्च का लाभ नहीः

इधर, विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2022-23 का महालेखाकार का अनुपालन प्रतिवेदन पेश किया। जिसमें कहा गया है कि पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण विकास विभाग ने दो-दो योजनाओं पर करीब 41.10 करोड़ रुपए खर्च तो किए, लेकिन आम लोगों को इस खर्च का कोई लाभ नहीं मिला।

अधिकारियों के बीच समन्वय की कमीः

रिपोर्ट के मुताबिक, पथ निर्माण की ऑडिट में यह पाया गया है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को अतिरिक्त निधि प्रदान करने में विभाग ने असमर्थता जाहिर की। साथ ही निर्धारित समय के अंदर भू-अर्जन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए विभाग के कार्यपालक अभियंता और भू-अर्जन पदाधिकारी के बीच समन्वय की कमी रही। इस वजह से 19.15 करोड़ रुपए का खर्च का कोई फायदा आम लोगों को नहीं मिला।

पुल बना पर पहुंच पथ नहीः

इसी तरह से पथ निर्माण विभाग ने दामोदर और गवई नदी पर दो पुल बनाने के लिए 15.09 करोड़ रुपए खर्च किए। पुल का निर्माण तो हो गया, पर पहुंच पथ का निर्माण किया ही नहीं गया। क्योंकि इसके लिए भूमि का अधिग्रहण ही नहीं किया गया था। इस तरह इन दोनों पुल के निर्माण पर हुए खर्च का कोई फायदा आम लोगों को नहीं मिला।

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