JSSC-CGL paper leak:
रांची। JSSC-CGL पेपर लीक मामले में एक नया और गंभीर मोड़ आ गया है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की ताज़ा रिपोर्ट ने इस प्रकरण को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद CID को अपना पहले दिया गया हलफनामा वापस लेना पड़ा है।
FSL रिपोर्ट में मिले ठोस सबूत
पूर्व महाधिवक्ता और याचिकाकर्ता पक्ष के वकील अजीत कुमार ने बताया कि FSL ने कुल नौ मोबाइल डिवाइस की जांच की, जिनमें से कई में 22 सितंबर 2024 की परीक्षा से कई घंटे पहले ही प्रश्नों के सही उत्तर भेजे गए पाए गए। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी प्रश्न का सही उत्तर “√3” था, तो वही विकल्प मोबाइल मैसेज में पहले से मौजूद था। सभी मोबाइल डिवाइस नॉन-टैंपर्ड पाए गए, जिससे पता चलता है कि संदेश सही समय पर और वास्तविक रूप से भेजे गए थे।
CID ने पलटा हलफनामा
शुरुआत में CID ने अदालत में हलफनामा देकर कहा था कि पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला, लेकिन अदालत की नाराजगी के बाद जांच एजेंसी को अपना हलफनामा वापस लेना पड़ा। वकील अजीत कुमार ने कहा कि यह साफ संकेत है कि जांच एजेंसी शुरू से मामले को दबाने की कोशिश कर रही थी।
सरकार और JSSC पर सवाल
अजीत कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार और JSSC आयोग ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। FIR दर्ज करने में दो महीने की देरी हुई और परीक्षा बचाने की कोशिश होती रही। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी का काम सिर्फ तथ्यों को रखना होता है, किसी भी दिशा में मंतव्य देना नहीं।
छात्रों का भविष्य अधर में
इस केस से दो वर्ग के छात्र प्रभावित हैं – वे जिनकी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन हो चुकी है और नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, और वे जो चाहते हैं कि परीक्षा रद्द कर दोबारा हो। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, यदि परीक्षा की पारदर्शिता संदिग्ध हो तो उसे रद्द करना न्यायसंगत माना जाता है।
आगे क्या होगा?
मामला अब अदालत के फैसले पर निर्भर है। CID की जांच जारी है और इसमें समय लग सकता है। अदालत यह तय करेगी कि परीक्षा रद्द होगी या चयन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वकील अजीत कुमार ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और आयोग पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं करेंगे, तो छात्रों का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है।
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