Cyber crime:
रांची। रांची में साइबर अपराधियों ने डॉक्टर और रिटायर्ड मर्चेंट नेवी अधिकारी को फर्जी निवेश के लालच में फंसाकर कुल 8.35 करोड़ रुपए की ठगी कर ली। इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड मामले में रांची साइबर अपराध थाना की टीम ने मध्यप्रदेश के सिवनी जिले से आरोपी पवन गौर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड और व्हाट्सएप चैट रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी में किया गया था।
एफआईआर के अनुसार
एफआईआर के अनुसार, रांची के सदर अस्पताल के एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर ने 10 सितंबर को साइबर थाना में कांड संख्या 109/25 के तहत शिकायत दर्ज कराई। डॉक्टर को “Fyers Securities Pvt. Ltd.” नामक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां आकर्षक ट्रेडिंग ऑफर दिखाए गए। डॉक्टर को फर्जी ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया, जिसमें नकली मुनाफा दिखाकर विश्वास हासिल किया गया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न बैंक खातों में करीब 3.75 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए।
दूसरे पीड़ित रिटायर्ड मर्चेंट नेवी अधिकारी को फेसबुक पर चल रहे निवेश विज्ञापन “Nomura & GTPF” के जरिए झांसा दिया गया। आरोपियों ने उन्हें लगातार उच्च रिटर्न का लालच देकर 4.60 करोड़ रुपए ठगे। उन्होंने भी 10 सितंबर को कांड संख्या 110/25 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई।
रांची पुलिस ने बताया
रांची पुलिस ने बताया कि आरोपी के बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल फुटप्रिंट की जांच की जा रही है। एसीपी साइबर थाना ने कहा कि संभावित रूप से इस गिरोह के अन्य सदस्य देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय हो सकते हैं। पीड़ितों के पैसे ट्रेस करने और अन्य खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया जारी है, ताकि फंड रिकवरी और अन्य संभावित अपराधियों की पहचान की जा सके। यह मामला रांची में साइबर ठगी की गंभीर घटनाओं में शामिल है और जांच अभी पूरी तरह जारी है।
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