Congress: कांग्रेस ने अपने मंत्रियों से मांगी रिपोर्ट, 9 बिंदुओं पर देना है जवाब [Congress has sought a report from its ministers, they have to answer on 9 points]

Juli Gupta
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रांची। झारखंड की गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस ने अपमे मंत्रियों से रिपोर्ट मांगी है। पार्टी के चारों मंत्रियों से आलाकमान ने नौ बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने पार्टी के चारो मंत्रियों, राधाकृष्ण किशोर, पांडेय दीपिका सिंह, इरफान अंसारी और शिल्पी नेहा तिर्की को उन नौ बिंदुओं के बारे में आधिकारिक जानकारी दी है। जानकारी के अनुसार मंगलवार को चारो मंत्री बैठक कर मंत्रणा कर सकते हैं, ताकि जवाब तैयार कर सकें। संभव है कि चारो मंत्री किसी गुप्त स्थान पर बैठ कर इन बिंदुओं पर विचार-विमर्श करेंगे।

प्रदेश प्रभारी के राजू को भेजे जानेवाले सुझाव को अंतिम रूप देंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों के सुझावों का असर पार्टी और सरकार पर भी दिखेगा। क्योंकि, जिन विषयों पर काम नहीं हो रहा है, उसे पूरा करने के लिए सरकार पर और खुद मंत्रियों पर भी दबाव बढ़ेगा।

Congress: इन 9 बिंदुओं पर मांगी गई है रिपोर्टः

विचारणीय विषयों में पेसा नियमावली की अधिसूचना, मनरेगा के क्रियान्वयन में समस्याएं, केंद्र से राशि प्राप्त करने में अड़चन, किसानों के ऋण माफी की योजना, सहकारिता को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति, स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्यान्वयन, रिम्स का विस्तार एवं प्रस्तावित योजना, विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में किए गए वायदों की पूर्ति की स्थिति, नगर निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण एवं 20 सूत्री समितियों की कार्य प्रणाली शामिल है।

Congress: जानें, समस्याओं का हालः

सभी नौ विषय सीधे सीधे आम जनता से जुड़े हैं। पेसा नियमावली के अधिसूचित नहीं होने से राज्य में पेसा कानून लागू नहीं हो रहा है। भाजपा इसे मुद्दा भी बना रही है। वहीं रिम्स के विस्तार को लेकर कांग्रेस के ही दो बड़े नेता आमने-सामने हैं। नगर निकाय चुनाव में पिछड़ों के आरक्षण का मामला ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया अंतिम रूप नहीं लेने के कारण लंबित है। इसके अलावा चुनाव में किए गए वायदों पर भी पार्टी अपने ही मंत्रियों से जानना चाहती है कि वह कहां तक पूरा हो सका है। क्या अड़चने हैं। क्योंकि, संगठन की मजबूती के लिए चुनाव में किए गए वायदों पर अमल जरूरी है। अब चारो मंत्रियों के सामने मुश्किल ये है कि उठाये गये बिंदुओं को लेकर सरकार पर दबाव कैसे बनायें।

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