HIV-infected blood: लापरवाहीः 5 बच्चों को चढ़ा दिया HIV संक्रमित खून, सभी हुए पॉजिटिव

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रांची। चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की जिंदगी से बड़ा खिलवाड़ हुआ है। यहां पांच बच्चों को संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। इससे पांचों बच्चे एचआईवी पॉजिटिव हो गए। इस खुलासे से हड़कंप मच गया है।

जानकारी के अनुसार बीते तीन सितंबर को यहां थैलेसीमिया पीड़ित सात वर्षीय बच्चे को संक्रमित खून चढ़ा दिया गया है। 18 अक्टूबर को उसकी जांच की गई, तो वह एचआईवी पॉजिटिव मिला।

हाईकोर्ट ने लिया संज्ञानः

इसके बाद मामला गरमाया तो झारखंड हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया। जांच के आदेश दिए। फिर रांची से झारखंड सरकार की पांच सदस्यीय टीम चाईबासा सदर अस्पताल पहुंची और जांच की। पता चला कि चार और बच्चों को संक्रमित खून चढ़ाया गया था और उनकी भी एचआईवी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें से दो बच्चे अभी भी सदर अस्पताल के पीकू वार्ड में भर्ती हैं। इस टीम में निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. शिप्रा दास, डॉ. एसएस पासवान, डॉ. भगत और सिविल सर्जन डॉ. सुशांतो कुमार मांझी, डॉ. शिवचरण हांसदा व डॉ. मीनू कुमारी शामिल थे। इस टीम ने अस्पताल के ब्लड बैंक और पीकू वार्ड का निरीक्षण किया। बच्चों के परिजनों से विस्तृत जानकारी ली।

निदेशक बोले- चल रही है जांचः

निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं दिनेश कुमार ने बताया कि बच्चे एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं। इनके सोर्स ऑफ इंफेक्शन की जांच की जा रही है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों में संक्रमण कैसे आया। इसके लिए सीएस और डीएस से बात की है। इससे जुड़े सभी लोगों को बच्चों की खून की जांच का निर्देश दिया है। खून का रखरखाव और लैबोरेटरी में कैसे जांच हो रही है, उसका भी निरीक्षण किया है। उन्होंने कहा कि जिले में कुल 515 एचआईवी संक्रमित मरीज हैं। वहीं थैलेसीमिया के 56 मरीज हैं। विभाग को पूरी रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

कारणों की जांच की जा रहीः

उन्होंने कहा कि बच्चों के एचआईवी संक्रमित होने के कारण दो हो सकते हैं। या तो संक्रमित खून चढ़ाया गया या फिर अन्य कारणों से उनके शरीर में इन्फेक्शन आया। इन कारणों की जांच की जा रही है।

ब्लड बैंक और लैब में मिली कई खामियाः

मेडिकल टीम को ब्लड बैंक और लैबोरेटरी के निरीक्षण के दौरान कई खामियां और गंभीर अनियमितताएं मिलीं। डॉ. दिनेश ने बताया कि ब्लड बैंक और लैबोरेटरी में जो भी खामियां हैं, उसे दूर करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। इस बीच दो से तीन दिन तक ब्लड बैंक इमरजेंसी के रूप में काम करेगा।

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