Jhandagarhi controversy:
रांची। झारखंड की राजधानी रांची के झंडागड़ी इलाके में एक बार फिर तनाव का माहौल बन गया है। शनिवार को आदिवासी नेता अजय तिर्की ने मीडिया से बातचीत करते हुए साफ कहा कि “भले ही आज झंडा नहीं गाड़ पाए हों, लेकिन आने वाले दिनों में झंडा जरूर गाड़ा जाएगा।” उन्होंने झंडागड़ी की जमीन को आदिवासियों की बताते हुए दावा किया कि यहां झंडा लगाने से रोकने के पीछे प्रशासन और बिल्डरों की मिलीभगत है।
बिल्डरों पर गंभीर आरोप
अजय तिर्की ने कहा कि झंडा हटाने के दौरान कोई स्थानीय पहान (परंपरागत आदिवासी पुजारी) मौजूद नहीं था, लेकिन अब नियम-कानून की दुहाई दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय लोग बिल्डरों से पैसे लेकर आदिवासियों की धार्मिक आस्था को चोट पहुंचा रहे हैं। तिर्की ने कहा, “झंडा हटाने के वक्त बिल्डर का भतीजा भी मौके पर मौजूद था, जिससे स्पष्ट होता है कि यह एक सुनियोजित साजिश है।”
धमकी और दबाव का आरोप
अजय तिर्की ने दावा किया कि बिल्डरों ने जिन लोगों को झंडा हटवाने के लिए पैसे दिए हैं, अब उन्हें धमकी दी जा रही है कि अगर काम नहीं हुआ तो सबके नाम सार्वजनिक कर दिए जाएंगे।
निशा भगत पर व्यक्तिगत हमला
पत्रकारों द्वारा जब झंडागड़ी विवाद में निशा भगत की भूमिका के बारे में पूछा गया, तो तिर्की ने उनके मानसिक संतुलन पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह सिर्फ माहौल को भड़काने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका कैरेक्टर पहले ही सोशल मीडिया पर उजागर हो चुका है।
क्षेत्र में तनाव बरकरार
इस विवाद के चलते झंडागड़ी क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इलाके में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।
झंडागड़ी पर धार्मिक और सामाजिक अधिकारों को लेकर आदिवासी समुदाय का यह संघर्ष फिलहाल थमता नहीं दिख रहा।
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