Trump tariff: ट्रंप के टैरिफ का असरः झारखंड में 3000 लोगों की नौकरी और कपड़ा उद्योग पर संकट

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रांची। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ का असर झारखंड में भी दिखने लगा है। झारखंड का कपड़ा उद्योग संकट में आ गया है। इससे करीब 3000 लोगों की नौकरी संकट में पड़ गई है। राज्य के कपड़ा मिलो का करीब 80 फीसदी वर्क ऑर्डर कैंसिल हो गया है।

झारखंड से अमेरिका को 1193 करोड़ रुपए का निर्यातः

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस के आंकड़े बताते हैं कि 2024-25 में झारखंड से अमेरिका को 1193 करोड़ रुपए का निर्यात किया गया। यहां से मुख्यत: फेरो-अलॉय, रोलर बियरिंग, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, माइका, लाह, स्टील उत्पाद, इलेक्ट्रिकल उपकरण और कपड़े जाते हैं। इसी साल झारखंड का कुल निर्यात 16,644 करोड़ का रहा। इसमें 7.17% अमेरिका को, 6.87% नेपाल को और 3.09% चीन को निर्यात किया गया।

12000 युवाओं की आजीविका दांव परः

रांची और आसपास का क्षेत्र टेक्सटाइल हब बन चुका है। यहां ओरिएंट क्राफ्ट, अरविंद टेक्सटाइल्स, वेलेंसिया और अर्बन जैसी कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें करीब 12000 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। यही कंपनियां अमेरिका, जर्मनी और इंग्लैंड जैसे देशों को निर्यात करती हैं। अब पूरा सेक्टर खतरे में है।

कपड़े का निर्यात सबसे ज्यादाः

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारत से आयात किए जाने वाले उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाने का असर झारखंड पर भी पड़ेगा। यहां से हर साल करीब 1500 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट होता है। जिसमें कपड़ा, लाह उत्पाद और हैंडीक्राफ्ट सबसे ज्यादा हैं। सिर्फ अमेरिका को ही करीब 275 करोड़ रुपए का निर्यात होता है। सबसे ज्यादा संकट कपड़ा उद्योग पर आने वाला है। यदि निर्यात में भारी कमी आती है, तो आने वाले महीनों में करीब 3000 लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। सिर्फ कपड़ा उद्योग में ही 2500 लोग प्रभावित होंगे। टेक्सटाइल कंपनियों को विकल्प तलाशना आसान नहीं है। उन्हें नए ग्राहकों तक पहुंचने में वक्त लगेगा। तब तक एक्सपोर्टरों को नुकसान झेलना ही होगा और स्थानीय लोगों का रोजगार भी जाएगा।

नये मार्केट की जरूरतः

एक्सपोर्टर राजकुमार बियानी कहते हैं कि हम यहां से फायर ब्रिक्स भी निर्यात करते हैं। लेकिन, अब अमेरिका में यह महंगा पड़ेगा। फिलहाल वहां चीन से 30% टैरिफ लिया जा रहा है और भारत से 50%। इससे हमारा मार्जिन घट जाएगा और नए मार्केट में पकड़ बनाने में वक्त लगेगा। इसी तरह एक्सपोर्ट मामलों के जानकार विवेक टिबड़ेवाल का मानना है कि फेरो अलॉय, फायर ब्रिक्स, पैक्ड फूड जैसे उत्पादों पर भी टैरिफ बढ़ा है। हालांकि इनका निर्यात झारखंड से बहुत ज्यादा नहीं होता (करीब 75 करोड़)। लेकिन कपड़ा उद्योग को बचाने के लिए सरकार को ठोस पॉलिसी लानी ही होगी।

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