Assistant professor recruitments:
रांची। झारखंड के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में 1200 Need-Based Assistant Professors की नियुक्ति प्रक्रिया नौ महीने से रुकी हुई है। उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग ने फरवरी 2025 में प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। विभाग ने जांच पूरी कर रिपोर्ट जमा कर दी है, लेकिन अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।अभ्यर्थी जो आवेदन शुल्क जमा कर चुके हैं, नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं और वे असमंजस की स्थिति में हैं। अकेले रांची विश्वविद्यालय में 299 Need-Based Assistant Professors की नियुक्ति के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन बाहरी व्यक्तियों की संख्या को लेकर शिकायत मिलने के कारण रोक लगा दी गई।
शिक्षक की कमी के कारण
राज्य के अधिकांश कॉलेजों में शिक्षक की कमी के कारण पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। नियमित शिक्षक नियुक्ति में विलंब के चलते सरकार ने Need-Based प्रोफेसरों की भर्ती शुरू करने का निर्देश दिया था, लेकिन फिलहाल यह संभव नहीं हो पाया। कुछ विश्वविद्यालय जैसे डीएसपीएमयू और सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में रोक लगने से पहले कुछ विषयों की नियुक्ति पूरी हो चुकी है और शिक्षक कार्यरत हैं। बाकि विश्वविद्यालयों में प्रक्रिया रुकी हुई है। नियुक्त अभ्यर्थियों को मासिक अधिकतम ₹57,700 मानदेय का भुगतान होना था।
अभ्यर्थियों और कॉलेज प्रशासन नौ महीने खुश नहीं है
अभ्यर्थियों और कॉलेज प्रशासन दोनों नौ महीने से लंबित प्रक्रिया को लेकर असंतुष्ट हैं। शिक्षकों की कमी और पढ़ाई में बाधा को देखते हुए, स्पष्ट और त्वरित निर्णय की आवश्यकता है ताकि कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखी जा सके और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा हो सके।इस देरी के कारण न केवल शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता और पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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