Ranchi illegal liquor hotspot
रांची। झारखंड में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ उत्पाद विभाग की कार्रवाई तेज होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि गिरफ्तारी की रफ्तार बेहद कमजोर बनी हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दिसंबर तक राज्य के 24 जिलों में कुल 5975 अवैध शराब के मामले दर्ज किए गए, जबकि इनमें से सिर्फ 243 अभियुक्तों को ही जेल भेजा जा सका। इस दौरान विभाग ने 1 करोड़ 53 लाख 52 हजार 660 रुपये संधान शुल्क के रूप में वसूले हैं।
इस पूरे अभियान में रांची जिला केंद्र बिंदु बनकर उभरा है। राजधानी में सबसे ज्यादा 935 मामले दर्ज किए गए और 70 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई। इसके साथ ही रांची से 47 लाख 50 हजार 800 रुपये की वसूली की गई, जो राज्य में सबसे अधिक है। आंकड़े बताते हैं कि अवैध शराब नेटवर्क का बड़ा हिस्सा राजधानी क्षेत्र में सक्रिय है और विभाग की निगरानी भी यहीं सबसे ज्यादा है।
कई जिलों में हालात चिंताजनक हैं
हालांकि, दूसरी ओर कई जिलों में हालात चिंताजनक हैं। गुमला, लातेहार, गढ़वा, कोडरमा और चतरा जैसे जिलों में दिसंबर 2025 तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई। वहीं साहिबगंज में 99, चतरा में 92 और पाकुड़ में 44 मामले दर्ज किए गए, लेकिन गिरफ्तारी बेहद सीमित रही। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन जिलों में कार्रवाई कमजोर है या अवैध शराब का कारोबार छिपे तौर पर फल-फूल रहा है।
क्या कहती है आंकड़े?
पिछले वर्षों के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता दिखाते हैं। 2023-24 में 638, 2024-25 में 476 और 2025-26 में दिसंबर तक केवल 243 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई। यानी हर साल गिरफ्तारी की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केस दर्ज करने के साथ-साथ गिरफ्तारी, जांच और सजा की प्रक्रिया को मजबूत किए बिना अवैध शराब पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल होगा।

