हिंदुस्तान में हरेक विधा के लिए एक इष्टदेव हैं : राजलक्ष्मी सहाय

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रांची : ईश्वर और प्रकृति से अगर आप एकात्म हो जाते हैं तो फिर जिंदगी में सबकुछ सरल सहज उपलब्ध हो जाता है। शिक्षा का मकसद महज अंक प्राप्ति कर नौकरी लेना नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं तक पहुंचना है। ये बातें सोमवार को राजलक्ष्मी सहाय ने कहीं।

वे डीएसपीएमयू के इंग्लिश लैंग्वेज एंड लिटरेचर डिपार्टमेंट में आयोजित इंडक्शन प्रोग्राम बतौर मुख्य वक्ता बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में हरेक विधा के लिए एक इष्टदेव हैं। शल्य चिकित्सा के लिए गणेश, अर्थ के लिए लक्ष्मी और राजनीति के लिए कृष्ण। हम जो भी पढ़ते हैं, अगर उसे रिलेट कर पढ़ें तो सन्देश मूर्त रूप ले जीवन में घटित होगा। वहीं कार्यक्रम में वक्ता प्रो प्रकाश सहाय ने कहा कि कब ,कहां और कैसे – ये जिज्ञासा के मूल प्रश्न हैं। और शिक्षा इन्हीं प्रश्नों की खोज है।

इसलिए आप शिक्षक से प्रश्न करें। प्रश्न का होना ही विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी चिंता है। आगे उन्होंने कहा कि शिक्षक का काम पढ़ाना नहीं, छात्रों को दिशा देना है। शिक्षक का काम म्यूजिक कंपोजर का काम है। वो गाता नहीं, गाना का लय ,ताल ,छंद सेट करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा आपके प्रेजेंस ऑफ माइंड तक पहुंची तो ही शिक्षा है। सतयुग खत्म हो गया। और कलयुग में कलयुग का नियम चलेगा। इसलिए भक्ति के साथ युक्ति भी सीखनी पड़ेगी।

कार्यक्रम में कोर्स कॉर्डिनेटर डॉ विनय भरत ने बताया कि 2021 में स्थापित इस विभाग ने महज तीन साल में एक अच्छे शिक्षकों की टीम की मदद से बेहतरीन शैक्षणिक माहौल कायम किया है। नतीजतन आज विभाग सवा करोड़ का राजस्व विश्वविद्यालय मद में दे चुका है और यहां छात्राओं की  संख्या 50% से बढ़कर  60% हो गयी है।

कार्यक्रम में विभाग की शिक्षिका श्वेता गौरव ने विभाग की वार्षिक रिपोर्ट को पेश किया। इसी तरह शिक्षक सौरभ मुखर्जी ने गणेश वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की।मंच संचालन शिक्षिका रंजना और शुभांगी रोहतगी ने मंच संचालन किया। इंडक्शन के दूसरे सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन छात्रा मानसी विश्वास और सुरभि कुमारी ने किया।

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