Rajendra Institute of Medical Sciences:
रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स), में मरीजों के लिए जरूरी दवाइयों की कमी से अस्पताल प्रशासन और मरीजों के परिजनों में हड़कंप मच गया है।
रिम्स प्रबंधन को संदेह है कि अस्पताल की दवाइयां बाहर भेजी जा रही हैं, जिसके कारण अस्पताल में दवाओं की भारी किल्लत हो रही है। हालांकि, प्रबंधन के पास इस संदेह के पुख्ता सबूत नहीं हैं, और इस वजह से कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
Rajendra Institute of Medical Sciences: बाहर की दुकानों पर लगी भीड़:
रिम्स में दवाइयों की कमी के कारण मरीजों के परिजन दवाइयों के लिए बाहर की दुकानों का रुख कर रहे हैं। रिम्स के पास कई दवा दुकानें खुल चुकी हैं, जहां मरीजों और उनके परिजन रिम्स की सादा पर्ची पर दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
इन दुकानों में हमेशा भीड़ लगी रहती है, और कई दुकानदार अस्पताल के वार्डों तक दवाइयां पहुंचा रहे हैं, जिससे परिजनों को सुविधा हो रही है।
Rajendra Institute of Medical Sciences: नए फार्मेसी खोली गईं:
रिम्स तालाब के पास, जहां पहले राशन और कॉस्मेटिक की दुकानें थीं, अब फार्मेसी खुल गई हैं। ये दुकानें रिम्स में दवाइयों की किल्लत के कारण मरीजों की जरुरत को पूरा करने का काम कर रही हैं।
Rajendra Institute of Medical Sciences: प्रबंधन का संदेह, लेकिन कार्रवाई नहीं:
रिम्स प्रबंधन का कहना है कि अधिकांश दवाइयां अस्पताल के वार्डों में उपलब्ध कराई जाती हैं, फिर भी दवाओं की किल्लत से यह संदेह उत्पन्न हो रहा है कि रिम्स की दवाइयां बाहर भेजी जा रही हैं। इस पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी है, लेकिन पुख्ता सबूत नहीं मिलने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
Rajendra Institute of Medical Sciences: रिम्स के लिए चुनौती:
यह संकट रिम्स के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि सरकारी अस्पताल में मरीजों को जरूरी दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। हालांकि प्रशासन इस स्थिति को सुधारने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन समस्या का समाधान अभी भी दूर है।
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