राजधानी रांची में ऑटो – ई-रिक्शा की बंदी से आम जन की बढ़ी मुसीबतें [Problems of common people increased due to ban of auto-e-rickshaw in the capital Ranchi]

4 Min Read

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने आज 27 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है।

सड़क किनारे ऑटो और ई-रिक्शा तो खड़े हैं, लेकिन लोगों के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इससे आम लोगों को रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही है। लोग 10-10 किमी पैदल चलने को मजबूर हैं।

क्यों बंद है ऑटो और ई-रिक्शा

ऑटो और ई-रिक्शा चालकों के इस हड़ताल की वजह ट्रैफिक पुलिस और आरटीए सचिव की ओर से तय किए गए नए रूट हैं ।

दरअसल, रांची ट्रैफिक पुलिस और आरटीए सचिव ने शहर को चार जोन में बांट दिया है। इन जोन में ऑटो के लिए 17 और ई-रिक्शा के लिए 113 नए रूट तय किए गए हैं।

चालकों का कहना है कि इन नए रूट से उन्हें काफी परेशानी होगी। चालकों की मांग है कि इस नए नियम को वापस लिया जाए और पुराने रुट को दोबारा से बहाल किया जाए।

आम जन को हो रही है परेशानी

बता दें कि इस हड़ताल से आम आदमी को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह से ही सारे ऑटो और ई-रिक्शा सड़क किनारे खड़े हैं। क्योंकि इस हड़ताल की घोषणा कल 26 अगस्त को की गई थी, जिसके कारण कई लोग इस बंद से अनभिज्ञ थे।

सुबह से ही लोगों की भीड़ सड़क किनारे ऑटो के इंतजार में खड़ी है। लेकिन मजाल है कि कोई ऑटो इस बंदी में सवारी बैठा ले। कई ऑटो चालक लाठी डंडा लेकर इस बंदी को सुनिश्चित करने में जुटे हैं।

मीलों पैदल चलने को मजबूर

सड़क किनारे हमें कई ऐसे लोग मिले जो कई मील तक पैदल चलने को मजबूर थे। किसी को ट्रेन पकड़ना है तो कोई पड़ोसी जिले से राजधानी रांची इलाज कराने आया था।

धनबाद के मुकेश कुमार नागा बाबा खटाल चौक के पास खड़े ऑटो का इंतजार कर रहे थे। पुछने पर बताया कि कल यानी 26 अगस्त को धनबाद से रांची अपना इलाज कराने आए थे।

आज वापस लौटना था। लेकिन आज रांची में ऑटो और ई-रिक्शा की बंदी है। अब समझ नहीं आ रहा कि कैसे वापस लौटा जाए।

उसी रास्ते से एक व्यक्ति कंधे पर बैग टांगे और पसीने से लतपत हुआ धीमी चाल से आगे बढ़ रहा था। पुछने पर अपना नाम कलीम बताया। कहा लापुंग से आ रहा हूं, आज हटिया रेलवे स्टेशन से ओडिशा की ट्रेन है।

मालूम नहीं था कि रांची में ऑटो की बंदी है। कलीम ने बताया बंदी के कारण उन्हें पिस्का मोड़ से हटिया पैदल ही जाना पड़ेगा।

सड़क किनारे हमें कई ऐसे लोग मिले जो बंदी के कारण इसी तरह मीलों तक पैदल चलने को मजबूर दिखे। इसमें कई बुजुर्ग और स्कूली बच्चे भी शामिल हैं।

चालकों ने विरोध में जलाया था आरटीए सचिव और ट्रैफिक का एसपी का पुतला

ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि बंदी करने से पहले उन्होंने अपनी मांगों को लेकर कई बार अधिकारियों से बातचीत की कोशिश की, लेकिन कोई हल नहीं निकला।

इसके बाद बीते हुए कल यानी 26 अगस्त को रातू रोड से कचहरी चौक तक विरोध-प्रदर्शन किया गया, जिसमें आरटीए सचिव और ट्रैफिक एसपी का पुतला भी जलाया गया।

चालकों ने कहा की आज सुबह 5:00 बजे से ही ऑटो का परिचालन शहर में बंद कर दिया गया है। जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

इसे भी पढ़ें 

ऑटो व ई-रिक्शा चालकों के लिए ड्रेस कोड निर्धारित

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं