महिला आरक्षण बिल पर राष्ट्रपति की मुहर

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान है। राष्‍ट्रपति की मुहर के बाद इसे अब आधिकारिक तौर पर संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के रूप में जाना जाएगा।

हालांकि, राष्‍ट्रपति की हरी झंडी के बाद भी यह लागू नहीं होगा। कानून बनने में अभी इसे अब भी वक्‍त लगेगा। इसे अब भी 2 बड़ी बाधाओं से गुजरना है। ये हैं जनगणना और परिसीमन। दोनों ही काफी जटिल प्रक्रियाएं हैं। महिला आरक्षण बिल को इनके साथ जोड़ा गया है। दोनों प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही यह अमल में आ पाएगा।

2029 तक लागू हो पायेगा

जनगणना और परिसीमन दोनों ही समय लेने वाली प्रक्रियाएं हैं। ऐसे में इस बात के आसार हैं कि महिला आरक्षण विधेयक 2029 के बाद ही लागू हो पाएगा। वैसे, जनगणना 2021 में होनी थी। लेकिन, कोरोना की महामारी के कारण ऐसा नहीं हो पाया। यह अनिश्चितकाल के लिए टल गई। इसके बाद इसी साल जून में भारत के जनगणना रजिस्‍ट्रार जनरल ने एक अहम फैसला लिया।

उन्‍होंने जनगणना की खातिर प्रशासनिक सीमाएं तय करने की तारीख बढ़ा दी। इसे बढ़ाकर 1 जनवरी 2024 कर दिया गया। इन सीमाओं के तय होने पर ही जनगणना शुरू होती है।

बिल के साथ दूसरा पेच परिसीमन यानी डीलिमिटेशन का है। यह भी समय लेने वाली प्रक्रिया है। परिसीमन का काम परिसीमन आयोग के तहत होता है। इस आयोग की अध्‍यक्षता रिटायर्ड जज करते हैं।

इस प्रोसेस में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय की जाती हैं। चूंकि लोकसभा और विधानसभा में निर्धारित आबादी के लिए प्रतिनिधि होता है। लिहाजा, आबादी में बदलाव के साथ स्थिति में भी बदलाव आ जाता है।

यही कारण है कि जनगणना के बाद ही परिसीमन होता है। अच्‍छी बात यह है कि जनगणना-2021 डिजिटल तरीके से होनी है। हालांकि, वेरिफिकेशन में थोड़ा समय लग सकता है।

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