Governor: विश्वविद्यालयों में एक व्यक्ति, एक पद का सख्ती से पालन हो : गवर्नर

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रांची। राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक सुधार की दिशा में कड़ा संदेश देते हुए “एक व्यक्ति, एक पद” के सिद्धांत को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। साथ ही नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर (लेक्चरर) का एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में तबादले पर भी रोक लगा दी गई है।

राज्यपाल ने यह निर्देश राजभवन में आरयू, डीएसपीएमयू समेत आठ विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में अवर मुख्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी, आरयू के वीसी प्रो. दिनेश कुमार सिंह, डीएसपीएमयू के वीसी अंजनी कुमार मिश्र समेत अन्य विश्वविद्यालयों के वीसी मौजूद थे।

राज्यपाल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को विश्वविद्यालय में एक से अधिक पदों पर कार्य करने की अनुमति नहीं होगी। यह पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए जरूरी है।

आरयू-डीएसपीएमयू में कई अधिकारी एक से ज्यादा पदों परः

आरयू-डीएसपीएमयू में कई अधिकारी एक साथ कई पदों पर कार्यरत हैं। आरयू के सीसीडीसी डॉ. पीके झा एचओडी भी हैं और परीक्षा नियंत्रक संजय कुमार सिंह राजनीति विज्ञान विभाग के एचओडी भी हैं।

क्षमता अनुसार नामांकन लेः विश्वविद्यालय:

विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी आधारभूत संरचना की क्षमता के अनुसार ही छात्रों का नामांकन लें, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता न हो। कई प्रोफेशनल कोर्स में छात्रों की संख्या क्षमता से अधिक है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

परीक्षा खत्म होने के एक माह के भीतर रिजल्ट देः

विश्वविद्यालयों को परीक्षा खत्म होने के एक महीने के भीतर रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया गया है। यह कदम छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि उन्हें आगे की पढ़ाई और नौकरी के अवसर समय पर मिल सकें।

बिना रुचि वाले वोकेशनल कोर्स होंगे बंद:

राज्यपाल ने निर्देश दिया कि ऐसे वोकेशनल कोर्स जिन्हें छात्रों द्वारा पसंद नहीं किया जा रहा, उन्हें तत्काल बंद किया जाए। शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय जरूरी है।

नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर के तबादले पर रोकः

राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर जहां नियुक्त हुए हैं, वहीं काम करेंगे। तबादले पर पूरी तरह रोक है। कई मामलों में देखा गया है कि राजधानी से ग्रामीण क्षेत्र में ट्रांसफर होने पर शिक्षकों ने नौकरी छोड़ दी।

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