श्रीराम पर होंगे सबके नाम
रांची। रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के दिन हजारों माता-पिता चाहते थे कि उनके भी बच्चे 22 जनवरी को ही जन्म लें। पर सबके साथ ऐसा होना संभव नहीं था। दो दिन पहले तक के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ राजधानी रांची में सिर्फ 55 डिलिवरी ही कनफर्म हो सकी थी।
पर सोमवार देर रात के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इसलिए सिर्फ रांची के रिम्स और सदर सहित कई निजी अस्पतालों को मिलाकर 100 से ज्यादा डिलिवरी हुई। सबसे अधिक सदर अस्पताल में 29 बच्चों ने जन्म लिया। वहीं, रिम्स में 21 बच्चे पैदा हुए।
सेंटेविटा हास्पिटल में 6, हिल व्यू में 4 और मातृ जीवन में 4, सेवासदन में 4, रांची हॉस्पिटल में 4 और सहित अन्य अस्पतालों में आम दिनों के मुकाबले अधिक संख्या में बच्चों ने जन्म लिया। रांची के सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार के अनुसार अन्य दिनों के मुकाबले अधिक संख्या में बच्चों ने जन्म लिया है।
हर दिन सदर अस्पताल में 18 के करीब बच्चों का जन्म होता है। वहीं, रिम्स में हर दिन औसतन 12 से 15 बच्चे ही जन्म लेते हैं। इसे डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती और उनके घरवालों का बहुत ही ज्यादा प्रेशर था।
राम से जुड़े नामों की खोज शुरू
इन बच्चों को जन्म देने वाली माताएं बुहुत खुश हैं। श्री राम के साथ-साथ उनके घर में भी भगवान के रूप में बच्चे का जन्म हुआ है। भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा सबसे अच्छे मुहूर्त में हुआ। इस दिन बच्चे को जन्म देने वाली माताएं भी खुद को भाग्यशाली मान रही हैं।
वे कह रही हैं कि अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन ही बच्चे को जन्म देकर, वे माता कौश्लया जैसी भाग्यशाली माता कहलाएंगी। श्रीराम उत्सव के इस खास दिन में जन्म लेने वाले बच्चों के माता-पिता ने बताया कि वे अपने बच्चों के नाम राम नाम पर ही रखेंगे।
वहीं, बच्चियों के नाम में भी राम से मिलते-जुलते नाम खोजेंगे। उनका कहना था कि राम जी की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर हमारे घरों में भी लल्ला आए हैं। ऐसे में इस बेहद सुखद संयोग को उनके साथ जीवनभर रखने की योजना है।
डाॅक्टरों पर था बहुत दवाब
रिम्स की स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार इसे लेकर बहुत प्रेशर था। दर्जनों महिलाओं ने सोमवार को बच्चे को जन्म देने का दबाव दिया था। लेकिन जांच आदि के बाद छह महिलाओं को एडमिट कराया गया था। सामान्य दिनों में करीब 15 डिलीवरी हर दिन होती है।
ऐसे में रिम्स में रात 12 बजे से दिन के दो बजे तक 11 बच्चों ने जन्म लिया। इसके बाद भी देर शाम तक करीब नौ बच्चों का जन्म हुआ। यानी कुल 21 बच्चों ने जन्म लिया। बच्चों के परिजनों द्वारा अस्पताल परिसर में मिठाई भी बांटी गई।
कई माता-पिता का कहना था कि यह दिन बहुत शुभ है, इसलिए वे चाहते थे कि बच्चे का आगमन प्राण-प्रतिष्ठा के दिन ही हो।
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