रांची। प्रदेश बीजेपी कार्यालय में इन दिनों देवघर के पेड़ा की खूब चर्चा है। यहां मौजूद रहनेवाले पदाधिकारी और नेताओं का अब पेड़ा खा-खा कर दम फूल रहा है।
कई नेता तो हर दिन किसो के किलो पेड़ा घर लेकर भी जा रहे हैं। परेशानी अब और बढ़ गई है कि प्रदेश बीजेपी के पदाधिकारी और वरिष्ठ नेताओं के घर पर भी बेहिसाब पेड़े पहुंचने लगे हैं।
इतना ही नहीं रांची से लेकर दिल्ली तक गिफ्ट के रूप में पेड़े पहुंचाये जा रहे हैं। दरअसल देवघर का पेड़ा चर्चा में इसलिए है कि विधानसभा चुनाव निकट आ रहे हैं।
झारखंड विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही, भाजपा में टिकट की चाहत रखने वालों की संख्या बढ़ गई है।
हाल ही में हुई रायशुमारी के बाद, हर विधानसभा क्षेत्र से आधे दर्जन से ज्यादा नेता टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिससे पार्टी के लिए उम्मीदवारों का चुनाव एक कठिन हो गया है।
संथाल दौरा पर आने वाले बड़े नेताओं के सामने दावेदारी
हालांकि भाजपा की टीम ने रायशुमारी के दौरान कार्यकर्ताओं से संभावित उम्मीदवारों के नाम बंद डिब्बों में एकत्र किए थे, लेकिन टिकट के दावेदार अब भी पार्टी के बड़े नेताओं का ध्यान अपनी ओर खींचने और अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस होड़ में, कई दावेदार अनोखे तरीके अपना रहे हैं। चुनाव लड़ने का मन बना चुके नेता पार्टी बड़े नेताओं को अपना बायोडाटा सौंप रहे हैं।
परिवर्तन यात्रा के दौरान जो भी बड़े नेता क्षेत्र में आ रहे हैं, टिकट के दावेदार नेता झट से उन्हें अपना बायोडाटा सौंप देते हैं।
कुछ दावेदार तो अपनी गाड़ियों में अपने बायोडाटा की कई प्रतियां लेकर चल रहे हैं, ताकि मौका मिलते ही वे पार्टी के बड़े नेताओं को उन्हें दे सकें।
सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए दावेदार
एक टिकट के दावेदार ने बताया कि उन्होंने अपनी गाड़ी में आठ से दस सेट बायोडाटा की फोटोकॉपी रखी हुई है।
जैसे ही उनके क्षेत्र में कोई बड़ा नेता दौरा करता है और उनसे उन्हें मिलने का मौका मिलता है, तो सबसे पहले वे अपना बायोडाटा उन्हें सौंप देते हैं।
इसके अलावा, कई दावेदार अपनी दावेदारी मज़बूत करने के लिए क्षेत्र में दौरा भी शुरू कर चुके हैं और सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए हैं।
वे अपनी उपलब्धियों और योग्यताओं को उजागर करने के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों पर अपने विचार साझा कर रहे हैं ताकि मतदाताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर सकें।
रांची के बीजेपी कार्यालय में दावेदारों लंबी कतार
रांची में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में भी टिकट के दावेदारों की भीड़ लगी रहती है। जो नेता पहले ही अपना रिज्यूम सौंप चुके हैं, वे भी ज़िले में नेताओं के दौरे पर फिर से रिज्यूम और बायोडाटा देने में लगे हुए हैं।
यह स्थिति पार्टी के बड़े नेताओं के लिए असहज हो गई है, जिन्हें बार-बार दावेदारों को यह कहना पड़ रहा है कि बार-बार रिज्यूम देने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि उम्मीदवारों का चयन केंद्रीय नेतृत्व की ओर से किया जाएगा।
बावजूद इसके कई नेता बायोडाटा के साथ गिफ्ट लेकर भी प्रदेश कार्यालय पहुंच रहे हैं। उधर संथाल परगना के दर्जनों नेता प्रतिदिन कई-कई किलो देवघर का पेड़ा लेकर पहुंच रहे हैं।
पेड़ा पहुंचाये जा रहे वरिष्ठ नेताओं के घर
हालांकि, दावेदारों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है, खासकर देवघर, जरमुंडी, मधुपुर और सारठ विधानसभा क्षेत्रों से। इन क्षेत्रों के दावेदार अपनी दावेदारी मज़बूत करने के लिए तरह-तरह के जतन कर रहे हैं, जिसमें प्रदेश पदाधिकारियों के आवास पर सुबह-सुबह देवघर का प्रसिद्ध पेड़ा लेकर पहुंचना शामिल है।
इसके अलावा, वे रांची से लेकर दिल्ली तक अपने जातिगत समीकरणों और लॉबिंग के ज़रिए टिकट हासिल करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।
भाजपा के सामने अब चुनौती यह है कि वह इतने सारे दावेदारों में से सही उम्मीदवारों का चुनाव करे, जो न केवल जीत हासिल कर सकें बल्कि पार्टी की छवि को भी मज़बूत करें।
देखना होगा कि पार्टी किस रणनीति के साथ चुनाव में उतरती है और क्या उसके ज़मीनी स्तर पर किए गए काम और जनता से किए गए वादे उसे जीत दिला पाते हैं।
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