झारखंड एनडीए में चिराग पासवान को एंट्री नहीं ! [No entry for Chirag Paswan in Jharkhand NDA!]

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पटना, एजेंसियां। चिराग पासवान झारखंड की पॉलिटिक्स में एंट्री के लिए बेताब हैं। पर बिहार में उनकी सहयोगी बीजेपी ही उनकी राह में रोड़ा बन गयी है।

दरअसल, झारखंड में बीजेपी के साथ नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और सुदेश महतो की पार्टी आजसू का गठबंधन तय हो गया है।

बीते सोमवार को रांची में बीजेपी चुनाव समिति की बैठक के बाद चुनाव सह प्रभारी हिमंता बिस्व सरमा ने मीडिया से कहा कि विधानसभा चुनाव में जेडीयू और आजसू के साथ बीजेपी गठबंधन करेगी।

चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी रामविलास से गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर हिमंता ने कहा कि इसका फैसला दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

हिमंता बिस्व सरमा ने चुनाव समिति की बैठक के बाद कहा कि हमने चुनाव की तैयारियों को थोड़ा आगे बढ़ा दिया है।

परिवर्तन संकल्प यात्रा का खाका तैयार किया गया है, अगले दो तीन दिनों में इसको अमली जामा पहना दिया जाएगा।

चुनाव समिति का काम और परिवर्तन यात्रा दोनों समानांतर चलते रहेंगे और इस बीच जदयू और आजसू पार्टी से भी सीट को लेकर चर्चा पूरी कर ली जाएगी।

लोजपा को लेकर दिल्ली में होगा फैसला

हिमंता ने कहा कि लोजपा के बारे में दिल्ली ही बात करेगा, वो हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। लेकिन आजसू पार्टी और जेडीयू से हम झारखंड लेवल पर ही बातचीत कर लेंगे।

15 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जमशेदपुर आना है, जिसमें सरकारी कार्यक्रम भी है और राजनीतिक कार्यक्रम भी है।

ज्यादा सीटें चाहती है आजसू

आजसू और जेडीयू से बीजेपी के गठबंधन को हरी झंडी मिलने के बाद अब सीटों को लेकर चर्चा होगी। आजसू पार्टी जहां 2014 के फार्मूला से ज्यादा सीटें गठबंधन में चाहती है।

वही करीब दो दर्जन सीटों पर जेडीयू ने दावेदारी की है। जमशेदपुर पूर्वी सीट जहां से सरयू राय विधायक है, उस सीट को लेकर बीजेपी और जेडीयू में टकराव हो सकता है, क्योकि वो सीट बीजेपी की परंपरागत सीट है और वर्तमान में सरयू राय उस सीट से विधायक है, जो पिछले ही महीने जेडीयू में शामिल हुए है।

इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष खीरू महतो भी अपने बेटे के लिए एक सीट और पूर्व मंत्री सुधा चौधरी अपने लिए एक सीट चाहती है।

वही आजसू ईचागढ़ जैसी सीट चाहती है जो बीजेपी की परंपरागत सीट रही वही है, 2019 के चुनाव में बहुत कम अंतर से आजसू पार्टी वहां चुनाव हार गई थी और इस बार सुदेश महतो ने एक तरीके से वहां उम्मीदवार की भी घोषणा कर दी है।

2019 में भी लोहरदगा सीट को लेकर टकराव की वजह से आजसू और बीजेपी का गठबंधन टूट गया था और आजसू 50 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जो बीजेपी की हार की बड़ी वजह बनी।

इस बार दोनों दलों की ओर से बताया गया है कि गठबंधन के साथ ही चुनाव लड़ा जाएगा। पिछले सप्ताह ही गठबंधन को लेकर सुदेश महतो और अमित शाह के बीच दिल्ली में मुलाकात हुई थी।

अब सीटों के तालमेल को लेकर प्रदेश स्तर पर आजसू और बीजेपी के नेताओं के बीच चर्चा होगी। कई सीटों पर मामला फंस सकता है। ऐसे में बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व इन सीटों को लेकर कोई अंतिम फैसला ले सकती है।

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