हेमंत सोरेन के बाहर आते ही JMM में नई ऊर्जा का संचार, जानें आगे का सियासी समीकरण [New energy infused into JMM as soon as Hemant Soren came out, know the future political equation]

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रांची। जेल का ताला खुल गया है और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जेल से बाहर आ चुके हैं।

झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष करीब पांच महीने जेल में रहे। बावजूद इसके झारखंड की सत्ता और राजनीति में उनकी धमक दिखती रही।

बताते चलें कि इसी साल 31 जनवरी को श्री सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार किया था। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद झारखंड की राजनीति में बड़े बदलाव हुए।

झामुमो ने चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया, वहीं लोकसभा चुनाव में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को चेहरा बनाया।

कल्पना सोरेन ने बखूबी अपनी भूमिका निभायी। साथ ही गांडेय विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में जीत हासिल की।

लोकसभा चुनाव में झामुमो को दो सीटों की बढ़त मिली और कल्पना सोरेन ने राजनीति में अपनी धाक जमा दी। अब हेमंत सोरेन जेल से बाहर हैं।

हेमंत सोरेन के बाहर निकलने के बाद झामुमो में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। वहीं इंडी गठबंधन को भी ताकत मिली है।

फिलहाल चंपाई की कुर्सी सुरक्षित

झारखंड की राजनीति को अब नयी दिशा मिलने जा रही है। हेमंत सोरेन चुनावी मैदान में इंडी गठबंधन की धुरी होंगे, यह तो तय है।

वह विधानसभा चुनाव में नेतृत्व करेंगे, यह भी तय है। जेल से बाहर निकलने के बाद उनके लिए अभियान चलाना सहज हो गया है।

हेमंत सोरेन के बाहर निकलते ही चंपाई सोरेन सरकार को लेकर अटकलें लग रही हैं। झामुमो अंदरखाने की मानें, तो विधानसभा चुनाव में समय कम है, तीन से चार महीने के लिए शायद ही सरकार का चेहरा बदला जाये। यह मानकर चला जा रहा है कि चंपाई सोरेन की मुख्यमंत्री की कुर्सी फिलहाल सुरक्षित हैं।

सरकार के कामकाज की करेंगे मॉनिटरिंग

हेमंत सोरेन के जेल से निकलने के बाद सरकार के कामकाज में उनकी दखल बढ़ेगी। जेल में रहते हुए जो परेशानियां थी, वह अब नहीं रहेंगीं।

चंपाई सोरेन सरकार की सीधे मॉनिटरिंग करेंगे। भले ही मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन ना दिखें, लेकिन वह पावर सेंटर रहेंगे। सरकार के अहम फैसले में अब उनकी सीधी भागीदारी रहेगी।

इंडी गठबंधन में राहत, अब बनेगी रणनीति

पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बाहर निकलने के बाद झारखंड में इंडी गठबंधन के अंदर भी सहूलियत बढ़ेगी।

अब हेमंत कांग्रेस के नेताओं से सीधा संवाद करेंगे। विधानसभा चुनाव को लेकर खाका जल्द तैयार होगा।

रांची हो या फिर दिल्ली बातचीत में आसानी होगी। विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस आलाकमान की भी टेंशन अब कम हो गई है।

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