Jharkhand Tourism
रांची। झारखंड को प्रकृति की गोद में बसा राज्य माना जाता है। इस राज्य में प्राकृतिक सौदर्य कूट-कूट कर भरा है। पहाड़ी नदिया, पहाड़, जंगल, जल प्रपात आदि इससे राज्य के सौंदर्य में चार चांद लगाते हैं। ऐसे में यदि प्रकृति के इस खजाने में मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर का तड़का लग जाये, फिर क्या कहने। ऐसा ही कुछ हुआ लोहरदगा जिले में पहाड़ियों की बीच घिरे मगरदाहा जल प्रपात के पास। यहां 500 फीट ऊंचे रेलवे ब्रिज नंबर 27 पर ट्रेन गुजरती है, तो यह नजारा मन मोह लेता है। 500 फीट की ऊंचाई पर गुजरती ट्रेन, ट्रेन के पीछे मगरदाहा जल प्रपात की कल कल करती धारा, इस दृश्य को निहारते, आंखें थकती ही नहीं।
ऐसा लगता है मानो कोंकण रेलवे के दूध सागर फॉल पहुंच गये हों। जी हां, यह नजारा दूध सागर फॉल की याद दिलाता है। रांची-टोरी रेल रूट पर बने इस पुल पर शुरुआत में ट्रेनों को भी कुछ देर के लिए रोका जाता था, ताकि यात्री भी इस अनुपम दृश्य का लुत्फ उठा सकें, परंतु सिंगल लाइन होने के कारण बाद यहां ट्रेनों का ठहराव बंद हो गया।
झारखंड के दूसरे सबसे ऊंचे रेलवे पुल के निर्माण के समय किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह स्थान पर्यटकों की पहली पसंद बन जाएगा। आज यह जगह 27 नंबर ब्रिज के नाम से प्रसिद्ध हो चुकी है। एक समय नक्सलियों का गढ़ माने जानेवाली जगह में आज प्रतिदिन हजारों की संख्या में पर्यटक आ रहे हैं।
लातेहार से लोहरदगा जाने वाली सड़क पर करीब 10 किमी आने के बाद बायीं ओर एक फॉरेस्ट डिपर्टमेंट का छोटा सा कार्यालय दिखता है। यहीं से बायीं ओर 27 नंबर ब्रिज का रास्ता अंदर गया है। यहां से पतली सी पक्की सड़क अंदर गई है, जो दोनों ओर जंगलों से घिरी है। यह रास्ता भी काफी खूबसूरत है। शांत जंगलों से गुजरते हुए करीब 2 किमी चलने के बाद पहुंचते हैं 27 नंबर ब्रिज के निकट। यहां पर्यटकों के वाहनों के पार्किंग बनी है। साथ ही बैठने की जगह है, जहां बगल से रेलवे लाइन गुजरती है।
सामने ही एक-दो छोटी मोटी खाने-पीने की चीजों की दुकानें हैं। यहां चाय-पानी भी मिल जायेगा। यही से नीचे जाने की रास्ता है। यह रास्ता घनी झाड़ियों से घिरा है। आगे जाकर यह पगडंडडियों का रूप ले लेता है। फिर शुरू होती है नीचे जाने की सीढ़ियां। करीब 400 सीढ़ियां उतरने के बाद लगता है मानो जन्नत का नजारा सामने हो। चारो ओर ऊंची-ऊंची पहाड़ियां, पीछे दूर में मगरदाहा जल प्रपात की कल-कल करती धारा और पहाड़ों से गिरता पानी। बीच में 500 फीट की ऊंचाई पर रेलवे का 27 नंबर ब्रिज। ऐसे में अगर पुल से कोई ट्रेन गुजरती दिख जाये, तो फिर क्या कहने।
कुछ वर्षों से लोहरदगा की अन्य पिकनिक स्पॉटों की तरह ही कुडू थाना क्षेत्र के नामुदाग गांव स्थित रेलवे का पुल नंबर 27 भी पर्यटकों की खास पसंद बनी है। यही कारण है कि नए साल का जश्न मनाने यहां भारी संख्या में लोग पहुंचते है। सेल्फी प्वाइंट के नाम से फेमस इस पुल पर अभी बीते कुछ समय हुए घटनाओं को ध्यान में रखते हुए ट्रैक पर आवागमन पर बैन लगा दी गई है।
दूसरी ओर पुल के नीचे धोरधरवा नाला का आनंद उठाने लोग जरूरत पहुंचते हैं। यहां उतरने के लिए वही सीढ़ियां काम आती हैं। यहां से लोग नीचे उतर पिकनिक मनाने का आनंद उठाते है। धोधरवा नाला से 500 फीट की ऊंचाई पर पुल से गुजरनी वाली ट्रेन का अदभुत नजारा भी काफी मनमोहित करता है। पुल के नीचे कल कल बहने वाली जलधारा मगरदाहा जलप्रपात से उतरती है। नीचे उतरकर थोड़ी दूर जाकर इस जलप्रपात का भी लुत्फ लोग उठाते है।
कुल मिलाकर 27 नंबर रेलवे पुल पिकनिक स्पॉट के रूप में विख्यात हो चुका है। अब तो प्रकृति की इस अनुपम खजाने के दीदार के लिए हजारों सैलानी देश विदेश से भी हर साल पहुंच रहे है। नए साल की बात छोड़ दी जाए तो सालों भर यहां सैलानियों का आवागमन लगा रहता है। आसमान की ऊंचाइयों से मुगलदाहा नदी और जल प्रपात को निहारने के लिए दिलों में याद रखने वाली तस्वीर, दूर-दूर तक फैली हरियाली बिखेरते जंगल, गगन को छूते पर्वत और कलकल बहती मुगलदाहा नदी लोगों को आकर्षित करती है। हाल ही में प्रकृति की सुंदरता को निहारने बेल्जियम से कई सैलानी पहुंचे हुए थे। इसीलिए तो कहते हैं कि झारखंड का ये नजारा नहीं देखा, तो क्या देखा।









