भाजपा के कई बड़े नेताओं पर गिरेगी गाज [ Many big leaders of BJP will be in trouble ]

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प्रदेश कार्यसमिति में बड़े बदलाव की तैयारी

रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भाजपा नेतृत्व पार्टी की प्रदेश कमेटी में बड़े बदलाव करने का मन बना चुका है। पार्टी के कई प्रदेश पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

बाबूलाल मरांडी द्वारा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश के बाद यह बात सामने आई है। बड़ी हार के बाद पहले रांची, फिर दिल्ली में होनेवाली चुनाव परिणाम की समीक्षा बैठक के बाद कड़े निर्णय लिए जाएंगे।

पार्टी नेतृत्व झारखंड में नया और सक्षम नेतृत्व उभारना चाहता है। इसके लिए कई स्रोत्र से मिल रहे नामों पर अनौपचारिक रूप से चर्चा भी हो रही है। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने इसी बात को ध्यान में रखकर दोनों चुनाव प्रभारियों और प्रदेश प्रभारी से रिपोर्ट मांगी है।

प्रदेश प्रभारी लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने इस संबंध में अधिकतर जिलाध्यक्षों और विधानसभा चुनाव प्रभारियों से बात की है।

उन्होंने लिखित रूप से सबसे हार के कारणों की जानकारी देने का निर्देश दिया है। अब तक करीब दो तिहाई जिलाध्यक्षों और प्रभारियों ने लिखित जानकारी भेज दी है। जिसके अनुसार कुछ प्रदेश पदाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आती है।

शनिवार को प्रदेश प्रभारी रांची आएंगे। वे इन आरोपों पर की पड़ताल के क्रम में प्रदेश पदाधिकारियों से बात भी कर सकते हैं। चूंकि बाजपेयी को इस संबंध में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री को रिपोर्ट देनी है, ऐसे में वे सभी आरोपों की जमीनी पड़ताल भी करेंगे।

चुनाव परिणाम के बाद कई विधानसभा प्रभारी, जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्षों ने केंद्रीय नेताओं से शिकायत की है। इसकी भी पड़ताल होगी।

प्रदेश भाजपा को नए साल के प्रारंभ में मिलेगा नया अध्यक्षः

प्रदेश भाजपा को नए साल के प्रारंभ में नया अध्यक्ष मिलेगा। जिनके क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशियों की हार हुई है, उनकी सूची बन रही है। ऐसे लोगों को किनारे किया जाएगा।

अभी प्रदेश कमेटी में शामिल कई बड़े नेता ऐसे हैं, जिन्होंने येन-केन-प्रकारेण पद तो पा लिए हैं, पर वोट डायवर्ट करने की क्षमता उनमें न के बराबर है। अभी पार्टी विधायक दल के नेता का भी चयन होना है।

ऐसे में अगर मरांडी नेता प्रतिपक्ष बन जाते हैं, तब भी नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाएंगे। अभी मरांडी और सीपी सिंह को सदन में जिम्मेदारी देने की बात चल रही है।

अगर सीपी सिंह नेता प्रतिपक्ष बन जाते हैं, तो प्रदेश अध्यक्ष के लिए भाजपा ओबीसी समाज से आनेवाले नेता का नाम आगे कर सकती है।

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