Maiya Samman Yojana: इंतजार खत्म! मंईयां सम्मान योजना की दो किस्तें एक साथ जारी, महिलाओं के खातों में पहुंचे ₹5000

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Maiya Samman Yojana

रांची। मंईयां सम्मान योजना से जुड़ी महिलाओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने योजना की 17वीं और 18वीं किस्त एक साथ जारी कर दी है। पहले चरण में झारखंड के 12 जिलों की लाभुक महिलाओं के बैंक खातों में ₹5000 की राशि भेजी जा रही है। यह राशि दिसंबर और जनवरी माह की दो किस्तों को मिलाकर दी जा रही है।

सरकारी जानकारी के अनुसार, यह भुगतान 17 जनवरी से 25 जनवरी के बीच अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। जिन जिलों में अभी तक राशि नहीं पहुंची है, वहां की महिलाओं को भी अगले कुछ दिनों में किस्त का लाभ मिलने लगेगा।

DBT के जरिए सीधे खातों में भेजी जा रही राशि

राज्य सरकार द्वारा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से राशि सीधे लाभुक महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जा रही है। जिन महिलाओं का बैंक खाता आधार से लिंक है और जिनकी जानकारी सही पाई गई है, उन्हें बिना किसी परेशानी के राशि मिल रही है।

इन 12 जिलों की महिलाओं को पहले मिला लाभ

मंईयां सम्मान योजना की 17वीं और 18वीं किस्त का लाभ सबसे पहले जिन 12 जिलों की महिलाओं को दिया जा रहा है, वे रांची, धनबाद, देवघर, बोकारो, गुमला, लोहरदगा, जमशेदपुर, जामताड़ा, सिमडेगा, चतरा, पाकुड़ और गढ़वा हैं। इन जिलों में लाभुक महिलाओं के आवेदन पहले ही सत्यापित हो चुके हैं और बैंक से संबंधित सभी विवरण सही पाए गए हैं। इसी कारण भुगतान की शुरुआत इन्हीं जिलों से की गई है। अन्य जिलों की महिलाओं को भी जल्द ही राशि जारी की जाएगी।

ऐसे करें किस्त का स्टेटस चेक

लाभुक महिलाएं यह जानने के लिए कि 17वीं और 18वीं किस्त उनके खाते में आई है या नहीं, मंईयां सम्मान योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर स्टेटस चेक कर सकती हैं। वेबसाइट पर लॉगिन करें, आवेदन संख्या या आधार नंबर दर्ज करें, पासवर्ड डालकर लॉगिन करें, भुगतान विवरण सेक्शन में जाएं फिर मोबाइल नंबर दर्ज कर OTP से सत्यापन करें। सत्यापन पूरा होने के बाद स्क्रीन पर किस्त से जुड़ी पूरी जानकारी दिखाई दे जाएगी।

इसके अलावा बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर पर SMS अलर्ट भी मिलता है। यदि SMS नहीं आया है, तो पासबुक अपडेट कराएं या नजदीकी CSC सेंटर से संपर्क करें।
राज्य सरकार का कहना है कि इस योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक संबल देने का उद्देश्य लगातार मजबूत किया जा रहा है।

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