रांची। झारखंड में चुनाव से पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना‘ को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
सिमडेगा निवासी विष्णु साहू ने अपने वकील राजीव कुमार के जरिये जनहित याचिका दायर कर इस योजना पर रोक लगाने की मांग की है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकार चुनाव नजदीक देखकर मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त की योजनाएं बांट रही है।
दिया गया सुप्रीम कोर्ट का हवाला
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि मुफ्त में कुछ भी नहीं बांटा जा सकता।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह योजना पूरी तरह से चुनावी लाभ के लिए लाई गई है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करती है, इसलिए इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना के तहत, 21 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को 1000 रुपये दिये जाने का प्रावधान है।
अगर किसी परिवार में तीन महिलाएं और दो बुजुर्ग सदस्य हैं, तो उन्हें सरकार सालाना 60 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देगी।
इतना ही नहीं, अगली बार सरकार बनने पर इस राशि को बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति परिवार करने का भी वादा किया गया है। सरकार का दावा है कि इस योजना से अब तक 42 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ चुकी हैं।
योजना के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र और पंचायत भवन जबकि शहरी क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र या उपायुक्त द्वारा निर्धारित जगहों को आवेदन संग्रहण केंद्र बनाया गया है।
महिलाएं इन केंद्रों पर जाकर योजना के लिए आवेदन जमा कर सकती हैं। आवेदन के साथ एक पासपोर्ट साइज़ फोटो, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और राशन कार्ड की छायाप्रति जमा करनी होगी।
पहले इस योजना के लिए आवेदन सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जा रहे थे, लेकिन बाद में ऑफलाइन आवेदन का विकल्प भी दिया गया।
आवेदन मिलने के बाद, जानकारी को जैप आईटी द्वारा विकसित पोर्टल पर डिजिटाइज़ किया जाता है। यह प्रक्रिया उपायुक्त की देखरेख में पूरी की जाती है।
हाल ही में, महिला एवं बाल विकास विभाग ने योजना के क्रियान्वयन के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
इसके तहत, अब महिलाओं के लिए मतदाता पहचान पत्र अनिवार्य नहीं होगा। यह मामला अब झारखंड हाईकोर्ट में है और देखना होगा कि अदालत इस पर क्या फैसला सुनाती है।
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