रांची। अब गर्मी में तापमान चाहे 45-46 डिग्री हो या ठंड में 2-3 डिग्री, मौसम की बेरुखी ट्रेनों के लोको पायलट को परेशान नहीं करेगी।
वहीं, लंबे समय तक नेचुरल कॉल को रोके रखना नहीं पड़ेगा। उनकी सेहत व सुविधा को ध्यान में रखते हुए इंजन में एसी व टॉयलेट लगाने का काम किया जा रहा है।
दक्षिण-पूर्व रेलवे जोन के लोको शेड में 660 इंजनों में एयर कंडीशन (एसी) इंस्टॉल कर दिया गया है और टॉयलेट लगाने का काम तेजी से चल रहा है।
वहीं, नए इंजन में पहले से ही टॉयलेट अटैच आ रहा है। इस सुविधा का सबसे अधिक लाभ महिला लोको पायलट को होगा।
अभी परेशान रहते हैं लोको पायलट
मौजूदा समय में इंजन में टॉयलेट नहीं होने से कई बार महिला लोको पायलट को असहज स्थिति का सामना पड़ता था।
नेचुरल कॉल को भी काफी समय तक रोके रखना पड़ता था। ऑल इंडिया लोको पायलट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट रामजीत ने कहा कि लोको पायलटों को लंबे समय तक ट्रेन का परिचालन करना पड़ता है।
ऐसे में टॉयलेट की सुविधा नहीं होने से बहुत समस्या हो रही थी। 50% लोको पायलट शुगर और 90% गैस की बीमारी की समस्या से जूझ रहे हैं। रेलवे की यह पहल उनके सेहत के लिए बेहद लाभदायक होगा।
राजधानी व शताब्दी के इंजन में लगा एसी और टॉयलेट
रांची से चलनेवाली राजधानी, शताब्दी और नए इंजनों में टॉयलेट के साथ एयर कंडीशन की व्यवस्था कर दी गई है।
पूरा इंजन कंप्यूटराइज्ड आ रहा है। वहीं, नए इंजनों में भी टॉयलेट व एसी लगा आ रहा है। पुराने इंजनों में भी एसी लगा दिया गया है।
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