बच्चों का पोषाहार व टीकाकरण बंद
कोडरमा। झारखंड राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आठ सूत्री मांगों को लेकर 5 अक्टूबर से सेविका सहायिकाओं की राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है।
हड़ताल के पहले दिन कोडरमा जिले में 751 आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लटक गया है। 3 से 6 वर्ष के लगभग 25 हजार बच्चों को रोज मिलने वाला पोषाहार भी बंद हो गया है। टीकाकरण और बीएलओ का काम भी प्रभावित हो गया है।
जुलूस निकाल कर किया गया प्रदर्शनः
झारखंड राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका यूनियन (सीटू) के बैनर तले डॉ. उर्मिला चौधरी क्लिनिक के पास से विशाल जुलूस निकाला गया, जो रांची-पटना रोड हनुमान मंदिर, कोडरमा बाजार होते हुए समाहरणालय पहुंचकर प्रदर्शन व सभा में तब्दील हो गया।
मौके पर मुख्य वक्ता सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान ने कहा कि कहा कि केंद्र सरकार के द्वारा आईसीडीएस का निजीकरण कर और हर साल बजट में कटौती कर आंगनबाड़ी को समाप्त करने की साजिश कर रही है।
2017 के बाद से नहीं बढ़ा मानदेयः
उन्होंने कहा कि 2017 के बाद केंद्र ने सेविका सहायिका का मानदेय नहीं बढ़ाया है, जबकि महंगाई कई गुणा बढ़ गई है।
सेविका सहायिका बच्चों की देखभाल, नर्सरी शिक्षा, ताजा नाश्ता खाना देने के अलावा दर्जनों काम सरकार इनसे कराती है, सर्वजन पेंशन, सावित्रीबाई फुले योजना, मंईयां सम्मान योजना, अनाथ बच्चों का सर्वे सहित कई काम अलग से कराया जाता है. जिसका कोई अलग से मेहनताना नहीं दिया जाता है।
प्रदेश अध्यक्ष मीरा देवी ने कहा कि झारखंड सरकार ने 2022 में सेविका सहायिकाओं के लिए नियमावली बनाई थी। जिसके आधार पर सेविका सहायिकाओं के मानदेय में थोड़ी बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन इस महंगाई के दौर में वह काफी कम है।
सेविका व सहायिका के मानदेय में हर साल 500 और 250 रुपये बढ़ाना है जो कोडरमा जिला में लागू नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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