झारखंड के नेताओं को सामाजिक न्याय के बारे में सोचना होगा: प्रो दिलीप मंडल

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रांची : आजसू पार्टी महाधिवेशन के चौथे सत्र में ‘झारखंड में सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी’ विषय पर बतौर विशेषज्ञ बोलते हुए शुक्रवार को वरिष्ठ पत्रकार और एक्टिविस्ट प्रो दिलीप मंडल ने कहा कि राज्य के नेताओं को सामाजिक न्याय के बारे में संजीदगी से सोचना होगा। उन्होंने कहा कि बिना संसाधन के सामाजिक न्याय  नहीं हो सकता। झारखंड देश मे नौकरानी सप्लाई करने वाला राज्य है। इस कलंक को हटाने के लिए काम किए जाने की जरूरत है। 

झारखंड में एक डॉक्टर 6,073 आदमी का इलाज करता है, जो मानक से कहीं अधिक है। झारखण्ड देश का इकलौता राज्य है जहां 16 प्रतिशत आबादी होने के बाद राज्य में एक भी अनुसूचित जाति का मंत्री नहीं है। 14 प्रतिशत आरक्षण में लगभग राज्य की 137 जातियां शामिल हैं। जबकि 3 प्रतिशत आबादी वाले सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। उन्होंने कहा कि नार्थ ईस्ट की लड़कियां या साउथ की लड़कियां बर्तन नहीं धो रही है। यह बदलाव सिर्फ शिक्षा से होगा।

पढ़ाई अंग्रेजी में होनी चाहिए तभी बदलाव संभव है। साउथ के कई ऐसे राज्य हैं जिन्होंने अंग्रजी माध्यम को अपनाया है जिससे सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं। जब यहां के युवा अच्छी पढ़ाई के साथ बाहर अच्छी नौकरी करेंगे और वहां से पैसे झारखंड भेजेंगे, जिससे बदलाव संभव है।झारखंड आंदोलन सिर्फ झारखंड को भौगोलिक बदलाव लाना नहीं था। जब यहां के युवा अच्छी पढ़ाई के साथ बाहर अच्छी नौकरी करेंगे और वहां से पैसे झारखंड भेजेंगे तभी बदलाव संभव है।

अगर लोगों के जीवन स्तर में सुधार नहीं हुआ तो बदलाव कैसे आएगा। झारखंड का सपना अभी भी अधूरा है।  उन्होंने कहा कि विस्थापितों की लड़ाई बिनोद बाबू ने लड़ा था।  हमने भी आंदोलन में शामिल हो कर लाठियां खाई हैं। झारखंड आंदोलन मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा है।  इसी विषय पर के श्यामला ने कहा कि अपने अस्तित्व और संस्कृति को बचाने के लिए सभी वर्ग और समाज के लोगों को साथ आना होगा।  एक छोटे उद्योग से हजारों लोगों को काम मिलता है।

यह सिर्फ नौकरी अथवा रोजगार नहीं, स्वाभिमान से जीने का जरिया है‌। यह परिवार के जीवन स्तर को ऊंचा करने का माध्यम बनाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही सामाजिक न्याय का सबसे महत्वपूर्ण आधार है इस नींव को मजबूत करने से ही सामाजिक न्याय की नींव मजबूत हो सकती है।

इस सत्र में तमाड़ के ग्रमीणों के साथ बेलिस के आर्थिक और सामाजिक विशेषज्ञ कैंनी चैन ऑनलाइन माध्यम से जुड़े थे। इसी सत्र में झारखंड में  नियोजन, शिक्षा, विस्थापन पर जिलों  से आए कई पदाधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए और नवनिर्माण संकल्प समागम में उभरे विचारों को आम-अवाम के बीच ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।

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