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खिजरी विधानसभा क्षेत्र का हाल

रांची। आइडीटीवी इंद्रधनुष इस सेगमेंट में हम आपको आपके एमएलए के कामकाज का हाल बतायेंगे। इस कार्यक्रम के जरिए आपके एमएलए के बारे में जानकारी दी जायेगी।

उनके कामकाज के बारे में बतायेंगे। यह भी बतायेंगे कि बीते साढ़े चार साल में उन्होंने आपके लिए क्या किया। उन्होंने आपसे जो वादे किये थे, उन वादों का क्या हुआ।

इस कड़ी में रांची जिले के खिजरी विधानसभा क्षेत्र का हाल बताने जा रहे हैं। यहां के एमएलए हैं कांग्रेस के राजेश कच्छप, जो पहली बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।

इस लेख में हम आकलन करेंगे कि एमएलए साहब अपने वोटरों के भरोसे पर कितने खरे उतरे।

खिजरी विधानसभा क्षेत्र

खिजरी विधानसभा क्षेत्र रांची जिले के पूर्वी भाग में स्थित है। खिजरी विधानसभा क्षेत्र में कुल चार ब्लॉक और 243 गांव हैं। ये विधानसभा सीट एसटी समुदाय के लिए आरक्षित है।

2011 के सेंसस के मुताबिक खिजरी की 66 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है, वहीं 34 प्रतिशत आबादी शहर में।

2019 के आंकड़ो के मुताबिक खिजरी विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या तीन लाख छत्तीस हजार 222 है।

खिजरी के अधिकांश लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। जाहिर है, उनकी परेशानियां भी शहरी इलाकों से अलग हैं। सड़क, नाली, स्कूल, हॉस्पिटल, बिजली और पानी यहां के ग्रामीणों की बुनियादी जरुरत है।

पहली बार विधायक बने हैं राजेश कच्छप

2019 के विधानसभा चुनाव में इंडी गठबंधन की सरकार बनी। तब खिजरी में कांग्रेस के राजेश कच्छप चुनाव जीत कर पहली बार विधायक बने।

खिजरी के लोगों ने कांग्रेस के राजेश कच्छप पर भरोसा जताया। राजेश कच्छप पहली बार चुनाव लड़े और जीते।

तब, लोगों ने राजेश कच्छप के रूप में एक नए चेहरे पर भरोसा दिखाया था। लेकिन, क्या राजेश कच्छप लोगों के उस भरोसे पर खरे उतरे।

ज्यादातर लोगों ने अपने विधायक को देखा तक नही

खिजरी विधानसभा क्षेत्र में हमने लोगों से बीतचीत की, तो मालूम पड़ा कि ज्यादातर लोग तो अपने विधायक राजेश कच्छप को पहचानते तक नहीं हैं।

उन्होंने कभी उन्हें देखा तक नहीं। कुछ गांव में लोगों ने बताया कि विधायक जी चुनाव के समय वोट मांगने आये थे, तब उन्हें देखा था। उसके बाद तो आये ही नहीं।

जो लंबे चौड़े वादे करके वो गये थे, उसकी याद दिलाने जब ये लोग उनके यहां जाते है, तब भी उनसे मुलाकात नहीं होती। मानो विधायक न हुए, भगवान हो गये। गांवों में समस्याएं यथावत हैं।

बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे खिजरी के लोग

खिजरी के लोगों ने बताया कि वे आज भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं। बरसात के दिनों में घरों में पानी लगना आम बात है।

विकास के नाम पर बनी बनाई सड़कों को तोड़ कर अधूरा छोड़ दिया जाता है। नालियों का कोई ओर छोर नहीं है, जहां मन किया वहीं बना दिया।

बच्चे सरकारी स्कूलों को छोड़ प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने के लिए मजबूर हैं। नदियों में नाले का पानी बहाया जा रहा है। बिजली का कोई ठिकाना नहीं है।

विधायक सिर्फ मुख्य सड़कों का भ्रमण कर जनता का हाल देख लेते हैं, लेकिन संकरी गलियों में कौन कैसे रहता है, इसकी उन्हें कोई परवाह नहीं है।

एचईसी और विस्थापन क्षेत्र के बड़े मुद्दे

खिजरी विधानसभा क्षेत्र में ही देश भर में प्रसिद्ध कारखानों का कारखाना एचईसी अवस्थित है।
दशकों से इस इलाके में विस्थापन एक बड़ा मुद्दा रहा है।

लोग पक्का ठिकाना के लिए अब भी परेशान हैं। लेकिन इस क्षेत्र में भी कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है। सबसे बड़ी बात है कि एचईसी आज बदहाली के कगार पर पहुंच गया है।

यहां के मजदूरों को 22 माह से और अधिकारियों को 28 माह से वेतन नहीं मिला है। पर यहां के विधायक राजेश कच्छप के कानों पर जूं तक रेंगी।

एचइसी के लोगों का कहना है कि गाहे-बगाहे किसी कार्यक्रम में विधायक जी दिख जाते हैं, पर आर्थिक तंगी से जूझ रहे मजदूरों का हाल जानने कभी नहीं आये।

उनकी समस्या दूर करने की बात तो शायद उनके मन में कभी आई भी नहीं होगी। उनके लिए विधायक ने एक आवाज तक नहीं उठाई।

सदन के अंदर भी खामोश रहे

सदन के अंदर विधायक राजेश कच्छप ज्यादा खामोश ही रहे। साढ़े चार साल में शायद ही कभी ऐसा मौका आया कि विधायक जी ने अपने क्षेत्र से जुड़ा कोई सवाल उठाया।

ज्यादातर मौके पर वह सदन में मूक दर्शक ही बने रहे। मतलब क्षेत्र की समस्याएं सदन तक भी नहीं पहुंची, जिसके लिए खिजरी के लोगों ने उन्हें चुन कर सदन भेजा था।

विधायक ने किया क्या ?

अब सवाल उठता है कि आखिर विधायक जी ने किया क्या ? तो इसका भी जवाब है। विधायक जी इस दौरान कोलकाता घूम आये।

वह भी दो अन्य विधायकों के साथ 30-40 लाख रुपया लेकर साड़ी-कपड़ा खरीदने गये थे।

हालांकि जब कोलकाता में पैसों के साथ पकड़े गये, तो कई सारी बातें मीडिया में चली, लेकिन हम तो आपको वही बता रहे हैं, जो उन्होंने पुलिस को बताया था। उन्होंने बताया था कि वे ये लाखों रुपये लेकर साड़ी-कपड़े की शापिंग करने आये हैं।

धरे रह गये लोगों से किये गये वादे..

खैर ये तो विधायक जी की अपनी बाते हैं। पर क्षेत्र की जनता के भरोसा का क्या हुआ। वोटरों ले किये वादे भी पूरे नहीं हो सके।

खिजरी के लोग अपने विधायक के कामकाज से संतुष्ट नहीं दिखते। लोगों की नाराजगी आगे जाकर क्या गुल खिलायेगी, ये तो भविष्य के गर्भ में हैं। पर यहां के लोगों ने अपनी भाव भंगिमाएं दिखानी शुरू कर दी है।

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