रांची।अपराधियों और जेल अफसरो का गठजोड़…. सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है।
सोचनेवाली बात भी है कि आखिर कैदी और जेल के अधिकारी का गठजोड़ कैसे हो सकता है।
जंगल में शेर और बकरी एक ही किनारे पर पानी नहीं पी सकते, झारखंड की जेलों में गैंगस्टर और जेल अधिकारी एक ही टेबल पर जाम लड़ाते नजर आ सकते हैं।
अब आप पूछेंगे कैसे..तो साहब ये पैसा है और पैसों की खनक कुछ भी करा सकती है। पिछले दिनों खुलासा हुआ कि दो जेलों में पोस्टिंग के लिए अफसरों ने 75-75 लाख रुपये तक की पेशकश की थी।
क्या है गैंगस्टरों और जेल अधिकारियों का गठजोड़
पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के करीबी विनोद सिंह की व्हाट्सएप चैट से खुलासा हुआ है कि जेलों में ट्रांसफर-पोस्टिंग में सीएमओ के लेवल पर दखल थी।
बीते बुधवार को जब ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की रिमांड अवधि बढ़ाने की मांग की तो सबूत के तौर पर विनोद सिंह के व्हाट्सएप चैट का डिटेल कोर्ट में पेश किया।
विनोद सिंह हेमंत सोरेन के करीबी हैं। इस चैट में कई ट्रांसफर पोस्टिंग का जिक्र था। इसी में जेलरों द्वारा पोस्टिंग के लिए दिये ऑफर का मामला भी शामिल था।
हैरानी वाली बात थी कि किसी-किसी खास जेल में पोस्टिंग के लिए सीएम के स्तर पर पैरवी और इतना बड़ा ऑफर क्यों? तो आइए बताते हैं कि आखिर मामला क्या है।
दरअसल, झारखंडी की जेलों में कैद कई बड़े गैंगस्टर जेलों से ही अपनी सल्तनत चसा रहे हैं। वे बड़े आराम से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं और अपने गैंग के गुर्गों को डायरेक्शन देते रहते हैं।
जेल से ही वे रंगदारी वसूलते हैं, रंगदारी के लिए ठेकेदारों और कारोबारियों को धमकाते हैं। यहां तक कि जेल के अंदर से ही हत्याएं भी करा देते हैं।
जेल के अंदर रहते हुए बड़े-बड़े अपराध को अंजाम देना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। उनके एक इशारे पर जेल के अंदर नशे की सामग्री से लेकर हथियार तक पहुंच जाते हैं।
पिछले दिनों धनबाद मंडल जेल के अंदर डॉन अमन सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी गई।
इस घटना ने जेल प्रशासन से लेकर सरकार तक को हिला दिया। साथ ही ये स्थापित कर दिया कि जेल के अंदर तमाम अवैध सामान आसानी से पहुंच रहे हैं।
जेल के अंदर पहुंच वाले कैदी मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं। धनबाद जेल के अंदर हुई घटना के बाद किसी सबूत की जरूरत नहीं रह जाती।
अब यहां बड़ा सवाल उठता है कि आखिर यह सब चल कैसे रहा है। तो इसका सिंपल सा जवाब है जेल प्रशासन और अपराधियों के गठजोड़ से यह संभव हो पाता है।
आमतौर पर गैंगस्टर अपने पास फोन नहीं रखते। बल्कि उनके फोन तो जेल अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के पास ही रहते हैं।
अगर किसी गैंगस्टर के पास फोन होता भी है, तो किसी तरह के निरीक्षण या छापे से पहले उसे सूचना जेल के पुलिसकर्मियों या पदाधिकारियों से मिल जाती है।
यही कारण है जेल में पड़नेवाले छापे में कभी किसी अपराधी के पास से कोई भी अवांछित वस्तु नहीं मिलती।
बड़े गैंगस्टरों का खाना या तो बाहर से आता है या फिर जेल में ही अलग से पकता है।
यानी ऐसे गैंगस्टरों को वो तमाम सुविधाएं हासिल होती हैं, जो उन्हें बाहर मिलता है।
जेल के अंदर से रंगदारी के जरिए ये गैंगस्टर करोड़ों की कमाई कर रहे हैं और इसका बड़ा हिस्सा जेल अधिकारियों को भेंट चढ़ा रहे हैं।
गैंगस्टरों का यही चढ़ावा जेल अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का रेट बढ़ाता जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक अमन साहू, अमन श्रीवास्तव, सुजीत सिन्हा, अखिलेश सिंह, अनिल शर्मा, विकास दुबे,गोल्डी खान जैसे डॉन जिस भी जेल में होते हैं, उस जेल में ट्रासफर-पोस्टिंग की रेट हाई हो जाती है।
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