रांची। भारतीय प्रशासनिक सेवा की 1988 बैच की अधिकारी अलका तिवारी झारखंड की मुख्य सचिव बनी हैं। शनिवार को उन्होंने अपने पद पर योगदान दिया। बता दें कि 31 अक्टूबर को एल ख्यिांग्ते सेवानिवृत्त हुए। उनकी जगह अलका तिवारी को मुख्य सचिव बनाया गया है।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रही अलका तिवारी को केंद्र सरकार ने पिछले दिनों मूल कैडर में सेवा देने के लिए विरमित किया था। अलका तिवारी 30 सितंबर 2025 को सेवानिवृत्त होंगी।
अलका तिवारी केंद्रीय प्रतिनिुयक्ति से मुक्त होने के बाद वापस झारखंड आईं हैं। वर्तमान अपर मुख्य सचिव में सबसे वरीय होने के कारण अलका तिवारी को ये जिम्मेदारी सौंपी गई हैं।
नवनियुक्त मुख्य सचिव अलका तिवारी केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार के रूप में काम कर चुकी हैं। वे जनजाति आयोग के सचिव के रूप में भी काम कर चुकी हैं।
झारखंड में उपायुक्त और सचिव रह चुकी हैं
अलका तिवारी झारखंड में गुमला और लोहरदगा जिले में डीसी के पद पर काम कर चुकी हैं। वाणिज्यिक कर और वन एवं पर्यावरण विभाग में भी सचिव रह चुकी हैं।
तिवारी भारत सरकार के नीति आयोग में सलाहकार, उर्वरक विभाग में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव तथा उर्वरक, रसायन और औषधि विभागों में अतिरिक्त सचिव सह वित्तीय सलाहकार रह चुकी हैं। नीति आयोग में वित्तीय संसाधन, शिक्षा, पर्यटन जैसे विभागों में काम कर चुकी है।
ईमानदारी के लिए जानी जाती हैं अलका तिवारी
अलका तिवारी झारखंड में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन और ईमानदारी के लिए जानी जाती हैं। तिवारी मेरठ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में पीजी हैं। टॉपर होने के लिए उन्हें राज्यपाल का स्वर्ण पदक मिला है। उन्होंने यूके के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के सिविल और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग विभाग से एमएससी किया।
‘विकास परियोजनाओं के प्रबंधन और कार्यान्वयन’ में पाठ्यक्रम में शीर्ष स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक हासिल किया। अलका तिवारी रांची विश्वविद्यालय से लॉ (कानून) में स्नातक भी हैं।
उन्होंने यूएस के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से ‘वित्तीय समावेशन पर पुनर्विचार’ पर एक अल्पकालिक पाठ्यक्रम और यूएस के ड्यूक यूनिवर्सिटी से ‘वित्तीय सलाहकारों के लिए सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन’ पर एक और विशेष पाठ्यक्रम पूरा किया है।
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