अब खुलेगा राज-किसने किस प्लाट का बनवाया फर्जी डीड
रांची। रांची में हुए जमीन घोटाले की जांच ईडी कर रही है। ईडी अब जल्द ही गिरफ्तार अभियुक्तों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करनेवाली है।
इसमें खुलासा होगा किसने किस प्लाट के फर्जी डीड बनवाये। बताते चलें कि ईडी ने अब तक पूर्व सीएम हेमंत सोरेन, आईएएस अफसर छवि रंजन और कारोबारी अमित अग्रवाल सहित 22 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
कुल 51 छापेमारी और नौ सर्वे कर 1.25 करोड़ रुपए कैश जब्त किए गए हैं। वहीं आरोपियों के बैंक खातों में मिले 3.56 करोड़ रुपए को फ्रीज कराये गये हैं।
ईडी के अनुसार एक साल में 266 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति भी जब्त की गई है। इस घोटाले में तीन चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
जांच में मिले तथ्यों के बारे में 14 बार राज्य सरकार को जानकारी दी गई है। सरकार से एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की गई है।
ईडी के मुताबिक हेमंत सोरेन और बड़गाई अंचल के तत्कालीन राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद को बरियातू रोड की 8.86 एकड़ जमीन हड़पने और अपराध से आय प्राप्त करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
उस जमीन को भी जब्त कर लिया गया है, जिसकी कीमत करीब 31 करोड़ रुपए है।
ईडी ने बरियातू स्थित जमीन मामले में दो दिन पहले झामुमो नेता अंतू तिर्की और जमीन कारोबारी विपिन सिंह, प्रियरंजन सहाय एवं इरशाद अंसारी को गिरफ्तार किया था।
इन चारों की ईडी ने कोर्ट से पूछताछ के लिए सात दिनों की रिमांड मांगी थी। पीएमएलए की विशेष अदालत ने ईडी को पांच दिनों तक इनसे पूछताछ की अनुमति दी है।
अब इनसे 22 अप्रैल तक पूछताछ होगी। ईडी इससे पहले नौ अप्रैल को गिरफ्तार सद्दाम हुसैन और अफसर अली उर्फ अफ्सू खान को भी रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।
अब ईडी सभी को एक दूसरे के सामने बैठा कर जमीन घोटाला मामले में पूछताछ की तैयारी में है, ताकि यह पता चल सके कि किसने किन-किन प्लॉट की फर्जी डीड एवं दस्तावेज तैयार करवाए।
रिमांड पर लिए गए इन सभी आरोपियों पर जमीन के मूल दस्तावेज में हेराफेरी, छेड़छाड़ करने, जालसाजी करने, सीएनटी एक्ट से संबंधित प्रतिबंधित श्रेणी की जमीन की प्रकृति बदलकर गलत तरीके से उसकी खरीद-बिक्री करने का आरोप है।
ईडी ने मनरेगा घोटाले के आरोपी दो कार्यकारी अभियंता शशि प्रकाश और जय किशोर चौधरी की 22.47 लाख रुपए की चार अचल संपत्तियां जब्त कर ली।
मनरेगा घोटाले में ईडी की यह चौथी अस्थाई जब्ती है। 18.06 करोड़ रुपए के इस घोटाले में ईडी ने झारखंड पुलिस में दर्ज 16 एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी।
इस मामले में पुलिस की चार्जशीट से पता चला था कि जूनियर इंजीनियर राम विनोद प्रसाद सिन्हा, दिवंगत सहायक इंजीनियर आरके जैन, कार्यकारी अभियंता शशि प्रकाश एवं जय किशोर चौधरी भी इस गबन में शामिल थे।
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