झारखण्ड के ये 12 कलाकृतियों के बारे में आप नहीं जानते होंगे

झारखण्ड की विलुप्त होती ये 10 धरोहर कलाकृतियाँ जिसे आपका जानना जरुरी है।

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Highlights
  • झारखण्ड है भारत का सबसे खूबसूरत राज्य।
  • झारखण्ड ने अपने प्रकृति सौदंर्य की रक्षा कई वर्षो से करता रहा है।
  • झारखण्ड ने अपने संस्कृति और कलाकृतियों को आज भी संजो के रखा है।
  • ये कलाकृतियां भारत के लिए एक धरोहर है।

झारखण्ड के 12 मशहूर कलाकृतियां

झारखंड राज्य अपने प्रकृतिक सौंदर्य और खूबसूरती के लिए पुरे भारतवर्ष में मशहूर है। झारखण्ड राज्य के नाम में ही झाड़ और खण्ड शामिल है जिसका मतलब है “वनों की भूमि”। झारखण्ड राज्य इसके साथ ही अपने विशिष्ट कलाकृतियों के लिए भी जाना जाता है। निचे दिए गए वेब स्टोरी में हमने आपको ऐसे ही झारखण्ड की 10 मशहूर कलाकृतियों और शिल्पकृतियों की झलक दिखा रहे हैं।

१ . झारखण्ड का सोहराई चित्रकला

ये चित्रकला अपनी मोटी मोटी और गहरे रेखाओं और एकरंगी चित्रों से अपनी एक विशिस्ट पहचान बनाती है। सोहराई झारखण्ड का फसल काटने की ख़ुशी में मनाया जाने वाला पर्व है। इसीलिए इन चित्रों में ज्यादातर वनों, वन्य जीवों और पर्यावरण की चीजों को दर्शाया जाता है।

२ . झारखण्ड का मशहूर कोहवर चित्रकला

कोहवर चित्रकला नवविवाहित जोड़ों के कमरों में बनाया जाता है। कोहवर शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, कोह जिसका मतलब है “गुफा” और वर जिसका मतलब है “दूल्हा”। कोहवर चित्रकला झारखण्ड के साथ साथ पडोसी राज्य बिहार में भी मशहूर हैं जिसे मधुबनी कोहवर चित्रकला कहते है। इसे अकसर लाल या फिर पिली मिटी में दातुन को भिगोकर बनाया जाता है।

३ . झारखण्ड का जादोपाटिया चित्रकला

जादोपटिया चित्रकला में अकसर मनोरंजक चीजें, देवी देवताओं तथा दन्तकथओं को चित्रकला के जरिये दर्शाया जाता है। यह आदिकाल से चले आ रहे विभिन्न माध्यमों एक चित्रकला है। भारत में ऐसे कई सारे क्षेत्रीय कलाएं आज भी जिवंत है जो कि आपको उस दुनिया में ले जाते है जहां आपसी विचारों को साझा करने के लिए कोई आधुनिक सुविधाएँ नहीं होती थी।

४ . झारखण्ड का पैठकर चित्रकला

पैठकर कला राज्य की आदिवासी धरोहर में से एक है। पैठकर चित्रकला में झारखण्ड के क्षेत्रीय कथाओं – कहानियों, छोटी छोटी दंतकथाओं को एक श्रृंखला के तहत दर्शाया जाता है। इन आकृतियों में महाभारत और रामायण जैसे महाकाव्यों को भी दर्शाया गया है। पैठकर पेंटिंग झारखण्ड तथा भारतवर्ष के उस कला को अभी भी जीवंत रखे हुए जिनके साक्ष्य कभी मोहन जोदड़ो के अवशेषों में मिले थे। आदिकाल में जब भाषा या फिर लिखने की कला का उद्भव नहीं हुआ था तब लोग अपने बातों या फिर कहानियों को इसी तरह के एक श्रृंखला विहित कलाओं के जरिये संजोते थे। फिर इस कला का प्रयोग पाठ्य पठन तथा मनोरंजक कहानियों को प्रदर्शित काटने के लिए किया जाने लगा।

५ . झारखण्ड का कुर्मी चित्रकला

कुर्मी चित्रकला झारखण्ड की क्षेत्रीय जाति कुर्मी समुदाय द्वारा ठण्ड के मौसम में फसल कटने के खुशी में अपने घरों की दीवारों को सजाने के लिए बनती है। इन आकृतियों में धारीदार जानवर, लम्बी गर्दन और सींग वाले देवताओं को दर्शाया जाता है। इन चित्रकलाओं को प्रकृति रूप से मिलने वाली मिट्टी के रंगों से बनाया जाता है।

६ . झारखण्ड के आदिवासी आभूषण

आदिवासी आभूषण अपने आप में अलग ही आकर्सन पैदा करते है। इनमे झारखण्ड की क्षेत्रीय कलाओं का विवरण होता है। इनको बनाने के लिए चांदी और बेहद ही आसानी से मिल जाने वाले मोतियों का इस्तेमाल किया जाता है। आप क्षेत्रीय और देहाती महिलाओं को ये आभूषण अपने माथें पर टिकुली के रूप में या फिर कमर में करधनी के रूप में पहने हुए देख पाएंगे। इन आभूषणों की लिस्ट इतनी लम्बी है एक वाक्य में बयां करना मुश्किल है।

७ . झारखण्ड का टेराकोटा (मिट्टी से बनी कलाकृतियां)

मौर्या काल से चली आ रही ये मिट्टी की कलाकृतियां पुरे विश्व में आपको भारत में ही सबसे ज्यादा देखने को मिलेंगी। झारखण्ड की ये कला कुछ विशिस्ट इसलिए है क्यूंकि इन्हे क्षेत्रीय कुम्हार लाल मिट्टी से अलग अलग कलाकृतियां जैसे मिट्टी के जानवर, बर्तन इत्यादि बनाकर आग में पकाते है।

८ . झारखण्ड का डोकरा शिल्प (Lost Vax Technique of Jharkhand)

4000 साल पुरानी झारखण्ड की डोकरा कला धातुओं से बनाया जाता है। इन आकृतियों को बनाना एक बेहद ही जटिल कार्य है। झारखण्ड के पुंडी गांव के मल्होरे इस कला के संरक्षक और अभ्यासकर्ता हैं। डोकरा शिल्पों को मिट्टी के सांचों को गर्म तारकोल में ढककर तथा उनमे प्रकृति से जुड़ी हुई आकृतियां उकेरी जाती है। फिर इन साँचो में धातु भरकर आग में पकाया जाता है।

९ . झारखण्ड का कागज की कलाकृतियां (Paper Mache)

पेपर-मैशे एक ऐसी कला है जो कागज़ के गूदे को गोंद के साथ मिलाकर बनाई जाती है। पारंपरिक पेपर-मैशे बनाने की कला में निपुण कारीगर दुर्गा पूजा जैसे सांस्कृतिक उत्सवों और नाट्य प्रदर्शनों के दौरान नृत्य और अभिनय करने वाले सेराइकेला छऊ कलाकारों के लिए पौराणिक कथाओं पर आधारित ये मुखौटे बनाते हैं।

१० . झारखण्ड का लकड़ी की शिल्पकला (Woodcrafting in Jharkhand)

हरे-भरे पेड़-पौधों से भरपूर झारखंड राज्य लकड़ी के शिल्पों में भी समृद्ध है। लकड़ी से बनें रोजमर्रा की जरूरत के सामान, घर में इस्तेमाल होने वाले फर्नीचर के सामान जैसे कुर्सियां, मेज़, बक्से इत्यादि लकड़ियों से बनाये जाते है और इनमे झारखण्ड की क्षेत्रीय कलाकृतियों को बड़े सफाई के साथ उकेरा जाता है।

११ . झारखण्ड का बांस और बेंत की शिल्पकला

झारखण्ड के बांस पतले होने के साथ बेहद ही मजबूत होते है। इनसे बनी हुई कुर्सियां, टोकरी, शिल्पकलाएँ तथा अन्य रोजमर्रा की जरूरत के सामान। खास बात ये है की ये बांस से बनें शिल्पकलाएँ बेहद ही मजबूत और टिकाऊ होते हैं।

१२ . झारखण्ड का कुचाई या तुसार रेशम

भारत में तुसार रेशम के उत्पादन का लगभग 40% हिस्सा झारखंड का है। यह रेशम, विशेष रूप से साड़ी बनाने में उपयोग किया जाता है, चौड़े पंखों वाले पतंगों के लाखों जैविक रेशम के कोकून की कटाई से तैयार किया जाता है।

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