JSSC paper leak:
रांची। JSSC-CGL (कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा) के पेपर लीक मामले में हाईकोर्ट में लंबी बहस हुई। परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोपों के मद्देनजर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और JSSC की ओर से कोर्ट को बताया गया कि परीक्षा 22 सितंबर को संपन्न हुई थी, जबकि जिन फोटो को साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया, वे 23 सितंबर के हैं।
JSSC paper leak: सरकार और JSSC ने कोर्ट में कहा
सरकार और JSSC ने कोर्ट को स्पष्ट किया कि इन फोटो का पेपर लीक से कोई संबंध नहीं है और प्रार्थियों के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक रिजल्ट के प्रकाशन पर लगाया गया स्टे (स्थगन) बनाए रखा।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन और अधिवक्ता पीयूष चित्रेश ने बहस की, जबकि JSSC की ओर से अधिवक्ता संजॉय पिपरवाल और प्रार्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार पेश हुए। हाईकोर्ट की खंडपीठ में चीफ जस्टिस और जस्टिस राजेश शंकर ने सुनवाई की।
JSSC paper leak: कोर्ट ने कहा
कोर्ट ने कहा कि पेपर लीक से जुड़ी कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण सभी पक्षों को अगले सत्र में अपनी दलीलें प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया तब तक रुकी रहेगी जब तक अदालत अपनी अंतिम टिप्पणी नहीं देती।
यह मामला परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़ा है। प्रार्थियों का आरोप है कि पेपर लीक हुआ और उन्हें नुकसान हुआ है, जबकि सरकार का कहना है कि यह दावा आधारहीन है। हाईकोर्ट अगली सुनवाई में सबूतों और दलीलों को ध्यान में रखकर फैसला सुनाएगा।इस मामले से राज्य में शिक्षा और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, और छात्रों के भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा जारी है।
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