देश में सबसे ज्यादा बन रहे झारखंडी एलबम

IDTV Indradhanush
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रांची। पूरे देश में झारखंड में सबसे ज्यादा झारखंडी एलबम बन रहे हैं। हर 2 दिन में एक एलबम रिलीज होते हैं। लेकिन फिर भी संस्थागत संरक्षण के अभाव में गुमनामी और आर्थिक गुलामी में जी रहे हैं। जरूरत है , झारखंड को एक शासकीय संस्थाओं के संरक्षण में दिशा देना, ताकि कलाकारों को नियमित आय की प्राप्ति हो।

और ,वो कला के प्रति शत-प्रतिशत समर्पित हो सकें। उपरोक्त बातें  ट्राइबल सॉन्ग एंड लिटरेचर  पर आयोजित सेमिनार में अपने व्याख्यान के दौरान मुख्य वक्ता झारखंड की लोक कलाकार संध्या तिर्की ने कही। सेमिनार का आयोजन कान्फ्रेंस हॉल संख्या 2 , न्यू एकेडेमिक बिल्डंग में किया गया।

उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ी साहित्य से बी ए ऑनर्स और एम ए करने के बाद उनको महसूस हुआ कि अपनी झारखंडी भाषा के ऊपर भी काम होना चाहिए। गीत की भाषा सभी सीमाओं को लांघती है।

इसलिए अपने कुडुख ,मुंडारी, नागपुरी भाषाओं के लिखे गीत को पॉपुलर फॉर्मेट में तब्दील कर इसे भारत से बाहर भी पहुंचाया जा सकता है। साथ ही लोकल भाषाओं को ग्लैमराइज कर युवाओं का रुझान अपनी भाषाओं की तरफ मोड़ा जा सकता है।

ये अनुभव हुआ कि युवा स्पेनिश गानों को चुटुपालु घाटी में गुनगुना रहे। अगर हम अपनी भाषाओं को भी सुमधुर तरीके से पेश कर सकें तो वे text के मायने खोजने की तलाश में झारखंडी  भाषाओं को सीखने को प्रेरित होंगे। और तब से मैंने इस दिशा में बढ़ने का निर्णय लिया।

Youtube के माध्यम से 1 मिलियन से भी ज्यादा दर्शकों तक पहुंचने वाले गीत  जहिया से देखलो सनम .. की लिरिसिस्ट और गायिका संध्या तिर्की ने मौके पर सभागार में मौजूद 400 छात्रों के बीच जोहार ट्राइबल राजी, जोहार आदिवासी और  नैना से दूर जैसे गीतों की शानदार प्रस्तुति दी।

संध्या ने अपने बचपन के संघर्षों को साझा करते हुए कहा कि मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा यहां के झरनों से मिलती है , जो जितनी ज्यादा पठारों से टकराती है, उतनी ही मधुर संगीत उतपन्न करते हुए पत्थरों के सीने में छेद कर देती है।

संगीत इसी प्रकार टकराते हुए हिंसक समाज में भी प्रेम की सुराख बना सकती है।

मौके पर ई एल एल विभाग के कॉर्डिनेटर डॉ विनय भरत ने कहा कि आने वाले एक साल में अंग्रेज़ी साहित्य में ट्रांसलेस्टेड साहित्य के जरिए आदिवासी और क्षेत्रीय  भाषाओं के गीत संगीत पर काम होगा । द्वितीय फेज में यहां के जंगलों में बिखरे लोक कथाओं और अन्य साहित्य को संजोने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम का संचालन ईएलएल के फैकल्टी सौरभ मुखर्जी ने किया। विषय प्रवेश कर्मा कुमार ने, और श्वेता गौरव और शुभांगी रोहतगी ने अपने विचार साझा किया।

ईएलएल की छात्रा आयुषी भद्रा और तन्वी वर्दियर ने अतिथि का स्वागत किया। मौके पर मौजूद 400 छात्रों ने इस सेमिनार को काफी सराहा।

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