Jharkhand second-hand vehicle rules:
रांची। देशभर में सेकेंड हैंड वाहनों की बिक्री के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने यह प्रक्रिया अब केवल अधिकृत डीलरों के माध्यम से अनिवार्य कर दी है। इसके बाद झारखंड सरकार ने भी इस नई प्रणाली को लागू करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में मंगलवार को देवघर में मोटरयान निरीक्षक (MVI) बिमल किशोर सिंह ने सभी वाहन डीलरों के साथ बैठक कर नए प्रावधानों की विस्तृत जानकारी साझा की।
MVI ने बताया:
MVI ने स्पष्ट किया कि नए नियम लागू होने के बाद कोई भी वाहन मालिक अपने स्तर से किसी अन्य व्यक्ति को वाहन नहीं बेच पाएगा। दोपहिया, चारपहिया और परिवहन विभाग के दायरे में आने वाले हर वाहन की खरीद-बिक्री केवल अधिकृत डीलर के माध्यम से ही की जा सकेगी। इसका उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, फर्जीवाड़े को रोकना और लेन-देन से जुड़ी विवादित स्थितियों को समाप्त करना है।
नए प्रावधानों के अनुसार:
नए प्रावधानों के अनुसार डीलर के लिए विभागीय लाइसेंस, नगर निगम का ट्रेड लाइसेंस, TIN नंबर और GST नंबर अनिवार्य किए गए हैं। इसके साथ ही डीलर द्वारा खरीदे गए हर वाहन की कीमत, वाहन की स्थिति और बिक्री के समय तय नई कीमत को विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करना आवश्यक होगा। वाहन की खरीद-बिक्री से होने वाले लाभ पर GST भुगतान भी जरूरी होगा।
एमवीआई ने बताया:
एमवीआई ने बताया कि वर्तमान में निजी फाइनेंस कंपनियों और एजेंटों के माध्यम से सेकेंड हैंड वाहनों की बिक्री में कई समस्याएं सामने आती थीं कागजों की खामियां, गलत मूल्यांकन, बकाया रकम, और दस्तावेजी विवाद जैसी शिकायतें अक्सर देखी जाती थीं, जो कई मामलों में अदालत तक पहुंच जाती थीं। नई प्रणाली से इन समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
बैठक के दौरान कई डीलरों ने दूसरे राज्यों के वाहनों की खरीद, व्यावसायिक लेन-देन में आने वाली दिक्कतों और प्रक्रिया को और सरल बनाने से जुड़े सुझाव दिए। MVI ने सभी डीलरों से एक सप्ताह के भीतर अपनी समस्याएँ और सुझाव विभाग को लिखित में भेजने को कहा, ताकि मुख्यालय स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकें। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सभी तैयारियां पूरी होने के बाद यह नई प्रणाली जनवरी के अंतिम सप्ताह या फरवरी के पहले सप्ताह से लागू हो सकती है। नए नियम लागू होने के बाद हर वाहन की जांच MVI स्तर पर अनिवार्य होगी। इससे खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी और चोरी, फर्जी दस्तावेज और गलत मूल्यांकन जैसे मामलों पर प्रभावी रोक लग सकेगी।








