Neera Yadav: शून्यकाल में बोलने का मौका न मिलने पर नीरा यादव का फूटा गुस्सा, नाराज होकर निकली बाहर

Satish Mehta
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Neera Yadav

रांची। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बुधवार को भाजपा विधायक नीरा यादव उस समय नाराज हो गईं जब उन्हें शून्यकाल में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। इस घटना से क्षुब्ध होकर उन्होंने सदन से वॉकआउट कर दिया। बाहर आकर उन्होंने सरकार और विधानसभा की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे सदन में राजनीतिक माहौल और गरम हो गया।

नीरा यादव ने बताया

नीरा यादव ने बताया कि उन्होंने शून्यकाल में अपना सवाल उठाने के लिए नियमित प्रक्रिया के तहत सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं। शुरू में उन्हें बताया गया कि “अभी आपका समय नहीं है।” इसके बाद उनका सवाल दूसरे क्रम पर रखा गया, लेकिन फिर भी उन्हें बोलने का अवसर नहीं मिला। उनका कहना है कि यह विपक्ष के अधिकारों का सीधा हनन है और सरकार सुनियोजित तरीके से विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

सदन की व्यवस्था पर लगाए आरोप

सदन से बाहर निकलने के बाद मीडिया से बातचीत में नीरा यादव ने विधानसभा की कार्यप्रणाली को “अव्यवस्थित और पक्षपातपूर्ण” बताया। उन्होंने कहा कि रात 12 बजे तक प्रश्न जमा होते हैं, लेकिन इनकी सही मॉनिटरिंग नहीं होती। कई बार महत्वपूर्ण सवालों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान भी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को बोलने का बराबर मौका मिलना चाहिए था, लेकिन उनके नाम होने के बावजूद उन्हें मौका नहीं मिला। इससे उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि सरकार सुनियोजित रूप से विपक्ष की आवाज दबा रही है।

विधानसभा की कार्यवाही पर उठे सवाल

नीरा यादव के इस कदम ने सदन की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष पहले से ही विधि-व्यवस्था, बजट प्रबंधन और सदन में बोलने के अधिकारों को लेकर नाराज था। अब नीरा यादव के वॉकआउट ने यह मुद्दा और गंभीर बना दिया है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले दिनों में सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह विवाद का केंद्र बनेगी। वहीं, विपक्ष ने भी संकेत दिए हैं कि वे सदन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और सुधार की मांग को लेकर आवाज और बुलंद करेंगे।

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