बोर्ड निगम व आयोग के लिए लॉबिंग तेज, कई नेता लगाये हुए हैं टकटकी [Lobbying intensifies for Board, Corporation and Commission, many leaders are keeping an eye on]

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रांची। हेमंत मंत्रिमंडल के गठन होने के बाद से ही बोर्ड-निगम व आयोग के लिए लॉबिंग शुरू हो गयी है।

कई हेवीवेट नेता बोर्ड-निगम में अध्यक्ष की कुर्सी के लिए जोरदार आजमाइश कर रहे हैं। खास कर जेएसएमडीसी के अध्यक्ष के लिए। जरेडा और टीवीएनएल पर भी कई हेवीवेट नेताओं की नजर है।

फिलहाल राज्य में कई ऐसे बोर्ड निगम व आयोग हैं, जो प्रभार में चल रहे हैं। जेएसएमडीसी (झारखंड स्टेट मिनरल डेवेलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड), टीवीएनएल (तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड) के अलावा झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC), झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (JFDCL), झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB), झारखंड राज्य ऊर्जा विकास निगम (JSEDC) प्रभार में चल रहा है।

जानिए बोर्ड निगम और आयोग की हकीकत…..

चार साल से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी झारखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हो पायी है। जान लें कि राज्य सरकार लोकसेवकों के भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिए लोकायुक्त की नियुक्ति करती है।

चार साल से सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं

वहीं करीब चार साल से सूचना आयोग में आयुक्तों के पद खाली हैं। सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी का कार्यकाल 8 मई 2020 को पूरा हो गया था। उसके बाद से ही राज्य सूचना आयोग निष्क्रिय है।

यहां एक मुख्य सूचना आयुक्त सहित छह आयुक्तों की नियुक्ति का प्रावधान है। सभी छह पद मई 2020 से ही खाली पड़े हैं। करीब चार साल बाद एक बार फिर सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गयी है। हालांकि अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पायी है।

जेपीएससी भी अध्यक्षविहीन

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) भी अध्यक्ष विहीन है. बुधवार को ही आयोग की अध्यक्ष डॉ मेरी नीलिमा केरकेट्टा का कार्यकाल समाप्त हो गया। इनकी जगह किसी को अतिरिक्त प्रभार नहीं दिया गया है। जबकि जेपीएससी मुख्य परीक्षा का अभी परिणाम जारी होना है।

नियामक आयोग में भी अध्यक्ष नहीं

राज्यभर के 54 लाख बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों को सुनने वाला झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग भी अध्यक्ष विहीन है।

आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अमिताभ गुप्ता का कार्यकाल 31 मई को समाप्त हो गया। अब आयोग में सिर्फ मेंबर तकनीक अतुल कुमार और मेंबर लॉ महेंद्र प्रसाद ही बचे हैं।

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