दयानंद राय
रांची : आनेवाले लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और झामुमो के बीच सीटों के बंटवारे पर
सहमति बन गयी है। झारखंड की 14 लोकसभा सीटों में दोनों दलों के बीच सीटों का
बंटवारा 9 और 5 के अनुपात में होगा। यानि 9 सीटें कांग्रेस के खाते में जायेंगी और पांच
सीटें झामुमो को मिलेगी।
बीते लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस और झामुमो के बीच सीटों का
बंटवारा इसी अनुपात में हुआ था। हालांकि बाद में गठबंधन के घटक दलों की मांगों का
ख्याल करते हुए दोनों पार्टियों ने अपने-अपने हिस्से की सीटें दूसरे दलों को दी थीं। इसके
बाद 2019 में जहां कांग्रेस सबसे अधिक सात सीटों पर चुनाव लड़ी थी वहीं झामुमो चार
सीटों पर चुनाव लड़ा था।
झाविमो के खाते में दो सीटें गयीं थीं और राजद के हिस्से में केवल
एक पलामू सीट आयी थी। ऐसे में अब सवाल उठता है कि इंडिया गठबंधन में शामिल
राजद, जदयू और वाम दलों का क्या होगा।
राजनीति के गलियारे में जो कयास लगाये जा
रहे हैं उनके अनुसार कांग्रेस इस बार भी दो सीटें गठबंधन के घटक दलों को
देगी। ऐसे में राजद को एक और जदयू को एक सीट कांग्रेस के कोटे से मिल सकती है।
झामुमो अपने कोटे की एक सीट वाम दलों को दे सकता है।
बीते लोकसभा चुनाव में
गठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा इस अंदाज में हुआ था। इसमें कांग्रेस
को रांची, खूंटी, लोहरदगा, पश्चिमी सिंहभूम, हज़ारीबाग, चतरा और धनबाद सीट
मिलीं थी। वहीं, झामुमो को दुमका, राजमहल, गिरिडीह और जमशेदपुर मिला था।
झाविमो को कोडरमा और गोड्डा मिला था और पलामू राजद के खाते में गयी थी।
बीते चुनाव में गठबंधन का साथी झाविमो अब अतीत का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में
झाविमो को जो दो सीटें दी गयी थीं वे किसके खाते में जायेंगी यह गठबंधन के घटक
दलों को तय करना है।
झारखंड में लोकसभा चुनाव की स्थिति की बात करें तो साफ नजर आता है कि यहां
सियासी दलों के दो खेमे हैं। इनमें से एक खेमे में भाजपा और आजसू का गठबंधन है
जिसका लोकसभा की 12 सीटों पर कब्जा है, दूसरी ओर इंडिया गठबंधन का खेमा है
जिसका केवल दो सीटों पर कब्जा है।
वर्तमान राजनीतिक हालात को देखें तो
झारखंड में जदयू का अस्तित्व नगण्य है। जदयू का झारखंड में न तो कोई विधायक है
और न सांसद। राजद की बात करें तो राजद का झारखंड में सिर्फ एक विधायक है।
सांसद के लिहाज से झारखंड में राजद का कुनबा शून्य है। वाम दलों की दावेदारी भी
लोकसभा सीटों के लिहाज से कोई खास दबावकारी नहीं है।
ऐसे में गठबंधन के
घटक दलों में सबसे प्रभावी दल कांग्रेस और झामुमो ही हैं। इन्हीं दो दलों का अपने
घटक दलों के प्रति रूख से ही तय होगा कि दोनों अपने हिस्से की कितनी सीटों की
कुर्बानी दे पाते हैं। आनेवाले लोकसभा चुनाव में राजद निश्चित तौर पर अपने लिए दो
सीटें चाहेगा। जदयू और वाम दल भी एक-एक सीट चाहेंगे। यदि इनकी मांग पूरी
होती है तो ये गठबंधन के साथ रहेंगे नहीं तो अपनी डफली अलग बजायेंगे।
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