आजसू की ताल, BJP-कांग्रेस दोनों में कई दावेदार
रांची। एक अनार 100 बीमार। जी हां, हजारीबाग संसदीय सीट पर इन दिनों यह कहावत बिलकुल फिट बैठ रही है। आगामी लोकसभा चुनाव में हजारीबाग लोकसभा सीट पर उम्मीदवारी को लेकर शायद सबसे ज्यादा खींचतान देखने को मिल सकती है।
बीजेपी और कांग्रेस दोनों में ही दावेदारों की संख्या बढ़ गई है। उधर आजसू ने भी इस सीट को लेकर ताल ठोकना शुरू कर दिया है। इससे बीजेपी की परेशानी और बढ़ गई है। हालांकि यह बीजेपी की सीटिंग सीट है।
फिर भी बीजेपी नेताओं के माथे पर बल पड़े हुए हैं। आजसू पार्टी गिरिडीह के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी को इस बार हजारीबाग से चुनाव लड़ाना चाहती है। क्योंकि उसके पास गिरिडीह सीट के लिए एक और दावेदार है।
हजारीबाग के बीजेपी सांसद जयंत सिन्हा का पार्टी के अंदर दबदबा रहा है, इसलिए इस सीट को हासिल करना आजसू पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। परंतु अमित शाह के साथ सुदेश महतो की नजदीकियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि इस बार जयंत सिन्हा को बीजेपी के अंदर से भी चुनौती मिल रही है।
झारखंड में हजारीबाग संसदीय क्षेत्र हमेशा ही चर्चा के केंद्र में रही है। यशवंत सिन्हा की ये परंपरागत सीट मानी जाती रही है। अटल-आडवाणी के जमाने में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा का यहां क्रेज रहा है।
फिर उनके पुत्र जयंत सिन्हा के पास यह सीट आ गई। जयंत सिन्हा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की और केंद्र में मंत्री भी बने। इस बीच यशवंत सिन्हा ने बीजेपी से दूरियां बना ली। 2019 के चुनाव में दूसरी बार जयंत सिन्हा ने चुनाव में जीत हासिल की।
मगर इस बार वे मंत्री नहीं बन सके। 2014 के चुनाव में जयंत सिन्हा दो लाख के अंतर से जीते, तो 2019 में 4.79 लाख से अधिक अंतर से वह जीते। पर विभिन्न कारणों से इस बार बीजेपी के टिकट पर यहां से नये चेहरे की चर्चा तेज हो गई है। इसके बाद से ही इस सीट पर एनडीए में शामिल आजसू पार्टी ने नजर गड़ा दी है।
बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और आजसू पार्टी गठबंधन को राज्य की 14 में से 12 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इस चुनाव में बीजेपी ने आजसू पार्टी के लिए सिर्फ गिरिडीह सीट छोड़ी। 13 सीटों पर बीजेपी उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।
इस गठबंधन का बीजेपी को फायदा मिला। बीजेपी के 13 में से 11 उम्मीदवार विजयी रहे। जबकि गिरिडीह संसदीय सीट पर से आजसू पार्टी प्रत्याशी चंद्रप्रकाश चौधरी भी बीजेपी के सहयोग से विजयी रहे। पांच साल के बाद अब आजसू पार्टी और बीजेपी नेता सीट की अदला-बदली करने पर विचार कर रहे है।
दोनों दलों के नेता इस बदलाव में अपने फायदे की तलाश कर रहे हैं। हजारीबाग संसदीय क्षेत्र के रामगढ़ विधानसभा सीट से चंद्रप्रकाश चौधरी तीन बार विधायक रहे हैं। अभी यहां चंद्रप्रकाश की पत्नी और आजसू पार्टी की सुनीता देवी विधायक है।
वहीं हजारीबाग संसदीय क्षेत्र के बड़कागांव और मांडू विधानसभा चुनाव में भी पिछले चुनाव में आजसू पार्टी ने दमदार उपस्थिति दर्ज कराई थी। यही कारण है कि चंद्रप्रकाश चौधरी अपनी परंपरागत सीट की ओर से लौटना चाहते हैं।
इतना ही नहीं, 2004 के लोकसभा चुनाव में वह हजारीबाग संसदीय सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि तब उन्हें शिकस्त मिली थी। गिरिडीह सीट का पांच बार प्रतिनिधित्व कर चुके बीजेपी के पूर्व सांसद रबीन्द्र पांडेय भी चाहते हैं कि आजसू पार्टी के हजारीबाग शिफ्ट हो जाने से वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उनका रास्ता खुल जायेगा।
हजारीबाग सीट से भले ही आजसू पार्टी की ओर से अपनी दावेदारी की जा रही है, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के सामने जयंत सिन्हा भी कमजोर नहीं हैं।
पार्टी के अंदर उनकी पहचान वित्तीय मामलों के जानकार के रूप में है। वरिष्ठ नेताओं से उनकी नजदीकी है। केंद्रीय नेतृत्व उन्हें वित्तीय मामलों में बड़ी जिम्मेदारी देती रही है। जयंत सिन्हा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के भी करीबी माने जाते हैं। ऐसे में पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि जयंत सिन्हा का पत्ता काटना आसान नहीं होगा।
वैसे हजारीबाग सदर के बीजेपी विधायक मनीष जायसवाल, मांडू विधायक जेपी पटेल और पूर्व विधायक मनोज यादव भी इस सीट पर अपनी दावेदारी पेश की है। पूर्व कांग्रेस विधायक और मौजूदा बीजेपी नेता मनोज यादव की नजर हजारीबाग के अलावा चतरा सीट पर भी है।
पूर्व सांसद यदुनाथ पांडेय भी ताल ठोंक रहे हैं। इसके अलावा आईएएस कोचिंग चलाने वाले एके मिश्रा भी हजारीबाग सीट से बीजेपी टिकट के तलबगार हैं।
इधर, इस सीट पर I.N.D.I.A. गठबंधन में कांग्रेस की दावेदारी मजबूत मानी जा रही हैं। हालांकि हजारीबाग के पूर्व सांसद और भाकपा के पूर्व राज्य सचिव भुवनेश्वर प्रसाद मेहता की ओर से भी मजबूती से अपनी दावेदारी पेश की गई है।
लेकिन उनकी उम्र और राजनीतिक सक्रियता में कमी की वजह से उनकी दावेदारी पर सवाल उठ रहा है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट से गोपाल साहू को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वे जयंत सिन्हा के सामने कहीं टिक नहीं पाए।
इससे पहले 2014 में पूर्व विधायक सौरभ नारायण सिंह उम्मीदवार थे। सौरभ नारायण रामगढ़ राज परिवार से आते हैं। उनके परिवार का इस पूरे इलाके में कई दशक तक दखल रहा है। उनके परिवार से राम नारायण सिंह, ललिता राज लक्ष्मी और बसंत नारायण सिंह सांसद बनते रहे हैं।
लेकिन फिलहाल सौरभ नारायण सिंह कांग्रेस और हजारीबाग दोनों की राजनीति से दूर हैं। इस बीच पूर्व मंत्री योगेंद्र साव जेल से बाहर निकलने के बाद लगातार अपनी बेटी अंबा प्रसाद के लिए लॉबिंग कर रहे हैं।
अंबा प्रसाद बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र की कांग्रेस विधायक है और हजारीबाग क्षेत्र में अंबा प्रसाद काफी लोकप्रिय हैं। इसके अलावा कांग्रेस के कई और नेता भी इस सीट पर टकटकी लगाये हैं।
रामगढ़ की पूर्व कांग्रेस विधायक ममता देवी भी इस सीट पर जोर अजमाइश करने को तैयार बैठी हैं। कुल मिला कर यही कहा जा सकता है कि एक अनार और सौ बीमार।
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