रांची : तारीख थी 10 अगस्त 1975 और वो कालखंड था आपातकाल का। रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के घर में एक शिशु की किलकारी गूंजी। यह किलकारी थी हेमंत सोरेन की। यही बालक आज झारखंड का मुख्यमंत्री है और वे झारखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। आज उनका 48वां जन्मदिन है और इस मौके पर आइए उनके राजनीतिक सफर से रुबरु होते हैं।
बोकारो से स्कूलिंग करने के बाद हेमंत ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई बिहार के पटना हाई स्कूल से पूरी की। स्कूली दिनों में वे अंतर्मुखी छात्र थे। वर्ष 2003 में झामुमो छात्र मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। हेमंत बीआइटी मेसरा के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र रह चुके हैं।
उनकी मां रुपी सोरेन चाहती थीं कि हेमंत इंजीनियर बनें और अपने खानदान का नाम रौशन करें पर होनी को कुछ और मंजूर था। हुआ यह कि उनके बड़े भाई दुर्गा सोरेन का निधन वर्ष 2009 में हो गया। शिबू सोरेन के बाद दुर्गा सोरेन ही उनकी विरासत संभालने वाले थे, लेकिन उनके निधन के कारण हेमंत को गुरुजी की विरासत संभालने की जिम्मेवारी सौंपी गयी।
शुरुआती दौर में कहा जाता था कि वह झामुमो की विरासत संभाल नहीं पाएंगे। लेकिन इस कथन को उन्होंने झूठ साबित कर दिया। झामुमो को राजनीति के शीर्ष तक पहुंचा कर उन्होंने सबको चौंका दिया। बड़े भाई की मृत्यु के बाद पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हुए। 2009 में उनकी गिनती झारखंड के बड़े नेताओं में होने लगी । 24 जून 2009 को वे राज्यसभा के सदस्य बने।
यह सफर चलता रहा और 23 सितंबर 2009 को वे पहली बार विधायक बने। 11 सितंबर 2009 को झारखंड के डिप्टी सीएम बने। 2013 में पहली बार वे राज्य के युवा सीएम बने। झारखंड में वह आदिवासी नेताओं में इस समय सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं। 2019 में कांग्रेस और राजद के साथ गठबंधन बनाकर उन्होंने झारखंड में झामुमो की सरकार बनाई। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा की रघुवर सरकार को बुरी तरह हरा दिया। इस चुनाव में आदिवासी वोटरों के अलावा अन्य जाति के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर झामुमो का साथ दिया था।
झारखंड की राजनीति का कद्दावर चेहरा होने के साथ सीएम हेमंत सोरेन नई तकनीकों के भी जानकार हैं। उन्हें नए-नए इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स तलाश कर उन्हें चलाना और उनकी तकनीक के बारे में जानने का बेहद ज्यादा शौक है। वे अपने पास आईपैड जैसे हैंडहेल्ड गैजट भी रखना पसंद करते हैं। यही नहीं फोटोग्राफी करना और पेंटिंग भी उन्हें पसंद है। हेमंत सोरेन की राजनीति अब भी पूरी तरह से आदिवासियों के इर्द गिर्द घूमती नजर आती है।
अपने साढ़े तीन साल के शासनकाल में उन्होंने आदिवासियों के लिए कई योजनाओं को लांच किया है। झारखंड सरकार की नियुक्तियों में उनकी मजबूत भागीदारी के लिए उन्होंने कई नियमों में बदलाव किया है। आदिवासियों की भाषा-संस्कृति पर विशेष रूप से वह काम कर रहे हैं। राष्ट्रपति के चुनाव में उन्होंने महागठबंधन के फैसले को दरकिनार कर भाजपा प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू को इसलिए वोट दिया क्योंकि वह आदिवासी समुदाय से आती हैं।
पूर्णत: शाकाहारी भोजन पसंद करने वाले हेमंत सोरेन भाजपा के मुखर विरोधी नेताओं में से एक माने जाते हैं। कहा जाता है कि उन्होंने अपने पिता शिबू सोरेन की अंगुली पकड़कर राजनीति सीखी है। वे बिरसा मुंडा को अपना आदर्श मानते हैं।उनके पूरे राजनीतिक कैरियर में उनकी पत्नी कल्पना ने उनका पूरा सहयोग दिया है। वह उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहती हैं। इसलिए उनके राजनैतिक कार्यों में उनकी पत्नी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी मानी जाती है।
हेमंत झारखंड में दूसरी दफा मुख्यमंत्री बने हैं। वह राज्य के 11वें मुख्यमंत्री हैं। पहली बार वर्ष 2013 में 13 जुलाई को उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन वर्ष 2014 में चुनाव हार जाने के कारण 23 दिसंबर को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इस इस्तीफे के बाद उन्होंने विपक्ष के नेता के तौर पर राजनीति में अपनी पहचान और पुख्ता की।
राजनीति हेमंत सोरेन को विरासत में मिली है। बहुत कम समय में झारखंड की राजनीति में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से सोरेन ने आदिवासियों और गैर-आदिवासियों दोनों के लिए कई फैसले लिए हैं। उन्होंने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 और संताल परगना काश्तकारी (पूरक प्रावधान) अधिनियम 1949 में संशोधन का विरोध करने पर भाजपा सरकार की ओर से आदिवासियों के खिलाफ दर्ज किए गए आरोपों को हटा दिया।
जब मार्च 2020 में कोविड महामारी फैली, झारखंड लेह में फंसे प्रवासी कामगारों को एयरलिफ्ट करने वाला पहला राज्य था। हालांकि सोरेन को अन्य गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों की तरह नहीं माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में उन्होंने बंगाल की ममता बनर्जी और दिल्ली के अरविंद केजरीवाल के साथ धीरे-धीरे लेकिन लगातार अच्छे संबंध बनाए रखे हैं।
हालांकि मुख्यमंत्री के तौर पर उनके रास्ते में झंझावत भी कई आए। जमीन घोटाले को लेकर ईडी ने उन्हें समन जारी किया है। हेमंत सोरेन को ईडी ने पूछताछ के लिए 14 अगस्त को बुलाया है। ईडी इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। ईडी को जमीन घोटाला मामले की जांच कर रही है और ईडी इसी सिलसिले में हेमंत सोरेन से पूछताछ करेगी।








