रांची। कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों को अनुशासित रखना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है। कांग्रेस के विधायकों और मंत्रियों के बीच आपसी तालमेल की कमी सदन में कई बार दिख चुकी है। इसके पीछे की कहानी नेताओं के व्यक्तिगत आचरण से संबंधित ही है।अलग-अलग रास्तों से कांग्रेस में शामिल हुए नेताओं के बीच समन्वय की कमी दिखती है।
वहीं, एक-दूसरे को कमजोर बताने के चक्कर में वे अपनी और पार्टी की पद भी पिटवा रहे हैं। दूसरी ओर, पार्टी का भी इन विधायकों पर कोई नियंत्रण नहीं दिख रहा है। हाल में एक दो घटनाएं ऐसी हुई हैं, जहां कांग्रेस कोटे के मंत्रियों को अपने ही पार्टी और अपनी ही सरकार के विधायकों के आक्रोश का खामियाजा उठाना पड़ा है।
सदन में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की भिड़ंत अभी ताजी ही है। प्रदीप यादव ने जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था, जिस पर राधाकृष्ण किशोर ने चार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी। इसके बावजूद बाद में दोनों एक-दूसरे से उलझते दिखे।
इसके बाद दूसरी घटना भी इसी विधानसभा सत्र में देखने को मिली। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के बीच सदन में जमकर बहस हुई।
अगले दिन दोनों में सुलह होने की बातें सामने आई, लेकिन अगले ही दिन बात और बढ़ गईं। सदन में डॉ. इरफान अंसारी एवं राजद कोटे के मंत्री संजय यादव के बीच सार्वजनिक बकझक हुई।
इस सिलसिले में तमाम घटनाओं की जानकारी पार्टी आलाकमान तक पहुंच चुकी है। देखने की बात होगी कि आगे क्या कार्रवाई होती है। बहरहाल, यह स्पष्ट होता दिख रहा है कि कांग्रेस के विधायकों और मंत्रियों पर नियंत्रण बनाए रखना पार्टी के लिए भी मुश्किलों से भरा है। इस तरह से सरकार की छवि भी खराब हो रही है।
सुलझा सुदिव्य कुमार एवं इरफान के बीच नोकझोंक का मामलाः
वहीं, दूसरी ओर दो मंत्रियों सुदिव्य कुमार और इरफान अंसारी के बीच शुक्रवार को सदन में हुए नोकझोंक का मामला सुलझ गया है। दोनों मंत्रियों ने संयुक्त रूप से स्पष्ट किया कि उनके बीच अब किसी भी प्रकार का विवाद नहीं है।
उन्होंने कहा कि सदन में बहस और तकरार होना स्वाभाविक प्रक्रिया है और इसे सार्वजनिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। यह सदन के भीतर का मामला है। दोनों मंत्रियों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि उनकी लड़ाई आपसी नहीं, बल्कि भाजपा के विरुद्ध है। दोनों ने कहा कि उनका पूरा ध्यान राज्य के विकास पर केंद्रित और वे राज्य से भाजपा का सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बहरहाल इरफान अंसारी कुछ भी कहें, पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने उनकी बातों को हल्के में नहीं लिया है। झामुमो के कुछ नेता मामले को ऊपर तक ले जाने की बात कह चुके हैं। इतना ही नहीं, पार्टी के एक प्रवक्ता ने तो यहां तक कह दिया कि कांग्रेस के बड़बोले मंत्री को बदला भी जा सकता है।
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