PESA Act
रांची। हेमंत सोरेन कैबिनेट द्वारा पेसा (Panchayats Extension to Scheduled Areas) नियमावली को मंजूरी दिए जाने के बाद झारखंड में उत्साह और जश्न का माहौल है। बुधवार को राजधानी रांची के बरियातू स्थित पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के आवास पर जनजातीय समुदाय के लोगों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य किया, गुलाल लगाया और एक-दूसरे को बधाइयां दीं। इस मौके पर आदिवासी समाज के लोग इसे ऐतिहासिक दिन बताते नजर आए।
निशा उरांव बोलीं—अब कागज के अधिकार जमीन पर उतरेंगे
राज्य की पूर्व पंचायत निदेशक और आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने कहा कि पेसा कानून 1996 में संसद से पारित हुआ था, लेकिन अब जाकर इसकी नियमावली लागू होने का रास्ता साफ हुआ है। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में ही पेसा नियमावली का ड्राफ्ट तैयार हुआ था और इसमें आदिवासी समाज के सुझावों को शामिल करने के लिए कई कार्यशालाएं आयोजित की गई थीं। निशा उरांव के अनुसार, यह नियमावली तय करेगी कि पेसा कानून को राज्य में किस प्रक्रिया के तहत जमीन पर लागू किया जाएगा।
रामेश्वर उरांव ने बताया संघर्ष का इतिहास
पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि 24 दिसंबर 1996 को पेसा कानून बना था, लेकिन झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में इसका लागू न होना दुर्भाग्यपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि अब नियमावली की मंजूरी से आदिवासी क्षेत्रों में जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित होगी, जो पेसा कानून का मूल उद्देश्य है।
सालों की लड़ाई के बाद मिली जीत
लोहरदगा से आए आदिवासी प्रतिनिधि सोमेश उरांव ने कहा कि यह उपलब्धि वर्षों के संघर्ष के बाद मिली है। पेसा नियमावली लागू होने से ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार मिलेंगे और आदिवासी स्वशासन को मजबूती मिलेगी।
15 अनुसूचित जिलों में जल्द लागू होगा कानून
गौरतलब है कि देश के 10 पेसा राज्यों में झारखंड अब तक पीछे था। हेमंत सरकार ने 15 अनुसूचित जिलों में पेसा नियमावली को मंजूरी देकर बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी होने की संभावना है, जिससे आदिवासी स्वशासन की दिशा में नया अध्याय शुरू होगा।

